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| President Barack Obama at the White House |
आमतौर पर अमरीकी नागरिक धार्मिक लोग है. बहुतों के पूर्वज अपने मूल देश में किये जा रहे धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिये यहां आकर बसे थे. धार्मिक स्वतन्त्रता पहले संशोधन के जरिये अमरीकी संविधान में अन्तर्निहित की गई है. एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार 90 प्रतिशत अमेरिकी ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास करते हैं...और 78 प्रतिशत नियमित पूजा को जीवन का महत्वपूर्ण अंग मानते हैं.
अपने उदघाटन भाषण में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था संयुक्त राज्य अमेरिका सभी धर्मो के अनुयाइयों से मिलकर बना है. उन्होंने कहा "क्योंकि हम जानते हैं हमारी मिली-जुली विरासत हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारी शक्ति है. ये देश ईसाइयों और मुस्लिमों, यहूदियों और हिंदुओं और नास्तिकों सभी से समान रूप से मिलकर बना है."
उन्होंने कहा कि ये मिली जुली संस्कृति अमेरिका की स्थापना के समय से ही धार्मिक स्वतन्त्रता में इसके विश्वास के कारण विकसित हुई है. और हमें आशा है कि एक दिन ऐसा आयेगा जब पूरी दुनिया में कोई भी, कहीं भी अपने धर्म के पालन या फिर किसी भी धर्म को नहीं मानने के लिये स्वतन्त्र होगा...और उसे अपनी सरकार से किसी तरह के भेदभाव या उत्पीड़न का डर भी नहीं होगा.
अपनी पहली विदेश यात्रा से ही राष्ट्रपति ओबामा इन मुद्दों पर जोर दे रहे हैं. तुर्की की संसद को संबोधित करते हुये सभी लोगों की संपन्नता और न्याय के लिये उन्होंने आपसी खाई पाटने की बात कही. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये मुस्लिम देशों से संबंध सुधारने की अमेरिका की भावना पर उन्होंने विशेष जोर दिया.
उन्होंने कहा "हम समान हित और सम्मान पर आधारित व्यापक संबंध विकसित करना चाहते हैं. हम गलतफहमियों को दूर करके एकता पैदा करना चाहते हैं. हम मतभेद होने की अवस्था में भी दूसरे पक्ष का सम्मान करेंगे. इस्लाम के प्रति हमारे मन में गहरा सम्मान है....इस्लाम ने सदियों से समूचे विश्व पर अपना गहरा प्रभाव डाला है...और मेरे देश अमेरिका पर भी इस्लाम का गहरा प्रभाव पड़ा है."
श्री ओबामा ने कहा संयुक्त राज्य अमेरिका के विकास में मुस्लिम अमरीकियों का योगदान है. उन्होंने कहा "बहुत से अन्य अमरीकी परिवारों में इस्लाम को मानने वाले लोग हैं...या ऐसे लोग उनके परिवार का हिस्सा हैं जो मुस्लिम देशों से यहां आकर बसे हैं...मैं ये इसलिये कह रहा हूं कि मैं स्वयं इनमें से एक हूं."
श्री ओबामा ने कहा "हमारा ध्यान इस बात पर है कि हम मुस्लिम लोगों के साथ मिल कर ऐसा क्या कर सकते हैं...जिससे हमारी साझा उम्मीदों और सपनों को पूरा किया जा सके. और जब लोग पीछे मुड़कर आज के बारे में सोचें तो वे कह सकें कि अमेरिका ने सारी दुनिया की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था."