|
|
|
नई दिल्ली में भारत-अमरीका व्यापार वार्ताएं
|
26/10/2009
|
|
 | | US Trade Representative Ron Kirk, in India | दोनों देशों की व्यापार नीति मंच के एक अंग के रूप में अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि रौन कर्क ने भारत के व्यापार सचिव आनन्द शर्मा से मुलाक़ात की.
हालांकि पिछले दस वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार तिगुना होकर 43 अरब डौलर तक पहुंच गया है, अमरीकी अधिकारी उसे और बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने ध्यान दिलाया कि भारत के साथ अमरीका का व्यापार चीन के साथ व्यापार के मुक़ाबले दस प्रतिशत से भी कम है.
भारतीय वस्तुओं के सबसे बड़े निर्यातक देशों में अमरीका का दूसरा स्थान है, जहां सूती कपड़े, गहने और जवाहरात सबसे अधिक भेजे जाते हैं.
दोनों देश व्यापार और अधिक बढ़ाने के लिए एक पूंजीनिवेश समझौता करना चाहते हैं. भारतीय व्यापार सचिव के साथ बैठक के बाद श्री कर्क ने पत्रकारों को बताया कि ताज़ा वर्ताएं “काफ़ी रचनात्मक” रहीं और उनकी “प्रगति काफ़ी अच्छी” है.
“हमारी आज की वार्ताओं में सबसे बहुमूल्य था अपनी चुनौतियों के बारे में ईमानदारी और सच्चाई से बताना और इनमें से कुछ को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आवश्यक कठिन कार्य करने की वचन बद्धता व्यक्त करना.”
अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि ने हाल में संपन्न समझौते के क्रियान्वयन पर निराशा व्यक्त की जिसके अनुसार भारतीय आमों के अमरीका में बे रोक टोक आयात की अनुमति दे दी गई है और अमरीका की हार्ले डेविडसन मोटर साइकिलों को भारत की सड़कों पर भागने की अनुमति दे दी गई है. लेकिन श्री कर्क ने ध्यान दिलाया कि भारी सीमा शुल्क के कारण अभी तक एक भी अमरीकी मोटर साइकिल भारत को नहीं बेची जा सकी है.
उच्च अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि का यह प्रयास भी है कि भारत, अमरीकी पिस्तों के लिए अपनी मंडी खोल दे. यह मेवा शादी-ब्याह और त्यौहारों में अच्छा उपहार माना जाता है.
एक अन्य अन्सुल्झा विषय है बुद्धिजीवी संपत्ति की सुरक्षा, विशेष रूप से दवाइयों की सुरक्षा. भारत में दवाइयों की उत्पाद प्रक्रिया को तो कौपीराइट अधिकार दिए गए हैं लेकिन उसके तत्वों को नहीं. भारत में कई लोगों का तर्क है कि अधिक कड़े नियमों से निर्धनों के लिए दवाइयां ख़रीदना मुश्किल हो जाएगा.
भारत के व्यापार अधिकारी दूध से बनी चीज़ों जैसे अपने कुछ अपेक्षतया बड़े उद्योगों के लिए भी अमरीकी मंडियां खोलने का प्रयास कर रहे हैं. दूध के उत्पादन में भारत विश्व में पहले नंबर पर है.
चार वर्ष पहले भारत और अमरीका के बीच सरकारी स्तर पर व्यापार नीति मंच की स्थापना की गई थी. यह बैठक, मंच की छठी मंत्रिस्तरीय बैठक थी. अपनी भारत यात्रा के दौरान अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत के व्यापार प्रशासनिक अधिकारियों से भी भेंट की.
टिप्पणियां :
टिप्पणी करने वाले पहले व्यक्ति बने.
अपनी टिप्पणियां भेजे
इस आलेख के बारें में अपनी टिप्पणियां भेजे ताकि हम उन्हें यहां प्रकाशित कर सकें. हम आपका ई-मेल पता प्रकाशित नही करेंगे.
इस फॉर्म का इस्तेमाल करके आप इस बात पर राजी हुए हैं कि प्रकाशन के पहले आपकी टिप्पणियों का अवलोकन किया जाएगा सभी टिप्पणियां प्रकाशित नही की जायेगी वीओए को आपकी टिप्पणियों को विश्व भर में वीओए द्वारा प्रकाशित की जाने वाली सामग्री में प्रकाशित करने का अधिकार है. . Terms & Conditions.
|
|
|