लंबे समय तक अनिच्छा प्रदर्शित करने के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के 20 अन्य न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति की जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है. इन सभी ने स्वैच्छिक आधार पर अपनी संपत्ति की घोषणा कर दी और इस जानकारी को सर्वोच्च न्यायालय की वेबसॉइट पर उपलब्ध भी करा दिया गया है.
वेबसाइट में कहा गया है कि ये घोषणा पूरी तरह से स्वैच्छिक है.
सर्वोच्च न्यायालय से पिछले महीने विशेष अनुरोध पर सेवानिवृत्त हुये पूर्व न्यायाधीश बी. एन. अग्रवाल ने भी अपनी संपत्ति वेबसाइट पर डाल दी है.
न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा करने, नहीं करने पर भारत में गंभीर बहस चल रही थी. सूचना के अधिकार के अन्तर्गत न्यायाधीशों की संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है या नहीं इस पर अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हो रही है.
लेकिन इस बहस को देखते हुये सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने संपत्ति को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है. दशहरे और दीपावली के अवकाश के दौरान न्यायाधीशों ने संपत्ति का ब्योरा इकट्ठा किया और कुछ ने पेशेवर चार्टड अकॉउण्टेंट की भी मदद ली.