परमाणु अप्रसार संधि को सुरक्षित रखने और मजबूत बनाने के प्रति अपनी वचनबद्धता को दोहराते हुय संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भारत सहित अन्य देशों से कहा हा कि वो इस पर हस्ताक्षर करें.
अमेरिका-यूरोपीय संघ वर्ष 2009 की शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है, "हम लोग एनपीटी को बचाये रखने और मजबूत बनाने के लिये वचनबद्ध हैं."
घोषणा पत्र में कहा गया है कि ये संधि परमाणु अप्रसार, नि:शस्त्रीकरण और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के तीन साझा स्तम्भों पर आधारित है. अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कहा ये संधि अनोखी है और विश्व में शांति, स्थिरता को बनाये रखने में इसका कोई विकल्प नहीं है.
हालांकि भारत हमेशा से ही इस संधि को पक्षपाती और भेदभाव बढ़ाने वाला बताता रहा है और इस पर हस्ताक्षर करने की बात को कभी भी स्वीकार नहीं किया है.