सरकार द्वारा माओवादियों के विरुद्ध व्यापक कार्यवाही की आशंका को देखते हुये माओवादी भी बातचीत को तैयार दिख रहे हैं लेकिन उससे पहले वो चाहते हैं कि सरकार उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाये. एक वरिष्ठ माओवादी नेता ने कहा कि वो लोग बातचीत के लिये तैयार हैं बशर्ते दोनों पक्षों की तरफ से संघर्ष विराम का पालन किया जाये.
एक वरिष्ठ माओवादी नेता 'किशनजी' ने बृहस्पतिवार को कहा, "केंद्र सरकार से बातचीत केवल उसी हालत में प्रारंभ हो सकती है जब दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करें." माओवादी नेता से केंद्र के उस प्रस्ताव के संबंध में पूछा गया था जिसमें गृहमंत्री ने माओवादियों से कहा था कि वो पहले हिंसा बंद करें तभी सरकार बात कर सकती है.
इस माओवादी नेता ने फोन पर मीडिया से बात करते हुये केंद्र सरकार आरोप लगाया, "माओवादियों से निपटने के नाम पर केंद्र निर्दोष लोगों की हत्या कर रहा है और वो हमसे हिंसा छोड़ने की मांग कर रहे हैं जो कि हास्यास्पद है."
माओवादी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार को सात राज्यों - आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल से अर्ध सैनिक बल हटा लेने चाहिये.