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चीन ने बर्ड फ्लू के पहले सूचित मानवीय मामले से दो वर्ष पहले बर्ड फ्लू से मौत होने की पुष्टि की

08/08/2006

Chinese quarantine department officials check live chickens scheduled to be transported to Hong Kong
(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)

चीन ने 2003 में बर्ड फ्लू से एक व्यक्ति की मौत होने की पुष्टि कर दी है, जबकि बीजिंग ने बर्ड फ्लू के अपने पहले मानवीय मामले की खबर इसके दो साल बाद दी थी । इस खुलासे ने एक बार फिर बर्ड फ्लू रोग का पता लगाने और उसकी जानकारी देने के बारे में चीन की क्षमता पर चिंताएं पैदा कर दी हैं । बीजिंग से डेनियल शियर्फ की रिपोर्ट-

 

चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को पुष्टि की कि नवंबर, 2003 में अस्पताल में भर्ती 24-वर्षीय सैनिक के परीक्षणों से पता चला कि देश में बर्ड फ्लू से संक्रमित वह पहला ज्ञात मानवीय मामला था ।

 

उस व्यक्ति में निमोनिया जैसे लक्षण पाए गए थे और संदेह था कि वह सांस के रोग, सार्स से पीड़ित था, लेकिन उसके परीक्षण नकारात्मक रहे थे । कुछ दिन बाद एक सैनिक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी ।

 

इस संभावना का पता जून में चला कि उसकी मौत बर्ड फ्लू विषाणु एच5एन1 से हुई होगी, जब अस्पताल के 8 वैज्ञानिकों ने न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक पत्र प्रकाशित किया ।

 

चीन में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि इन वैज्ञानिकों ने नियमों का पालन करते हुए बर्ड फ्लू विषाणु पाए जाने की सूचना तत्काल स्वास्थ्य मंत्रालय को क्यों नहीं दी ।

 

उन्होंने कहा कि जाहिर है कि संबंधित सैन्य वैज्ञानिकों को कुछ समय पहले ही पता चल गया था कि वह एच5एन1 विषाणु था । हम यह नहीं जानते कि उन्हें कब यह पता चला, लेकिन निश्चय ही कुछ महीने पहले पता लगा होगा । उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को यह सूचना नहीं दी । इसलिए लगता है कि अंदरूनी सम्प्रेषण की समस्या थी ।

 

चीन के सैन्य अस्पतालों में पहले भी रोगों को छिपाया जाता रहा है । 2003 के दौरान, जब सार्स रोग फैला था तो उन्होंने जान-बूझकर सार्स के रोगियों की संख्या कम बताई थी ।

 

रोग छिपाने के कारण चीन को शर्मिंदा होना पड़ा था और इससे कम घातक रोग का प्रसार हुआ, जिससे अंततः दुनिया भर में करीब 800 लोगों की मौत हो गई ।

 

श्री वाडिया कहते हैं कि उसके बाद से संक्रामक रोगों से लड़ने के लिए चीन की निगरानी और सहयोग में सुधार हुआ है । परंतु उन्होंने कहा है कि यह संभव है कि बर्ड फ्लू के हर सही निदान किये गए मामले के अलावा अन्य कई मामले हो सकते हैं, जिनका पता नहीं चला या निदान नहीं हुआ, क्योंकि देश की बोझ से लदी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में खामियां हैं ।

 

उन्होंने कहा कि चीन जैसे देश में, जहां स्वास्थ्य सेवाएं बेतरतीब हैं, यह आश्चर्यजनक नहीं है । कई क्षेत्रों में ये सेवाएं मजबूत हैं, अन्यों में कमजोर हैं । कुछ क्षेत्रों में तो ये बिलकुल ही नहीं हैं ।

 

श्री वाडिया का कहना है कि यह संभव है कि चीन में अगर 2005 से पहले ज्यादा नमूनों का परीक्षण किया जाता तो बर्ड फ्लू संक्रमण के कई अन्य मामले सामने आते ।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि फरवरी, 2003 में हांगकांग में एक परिवार के दो सदस्य बर्ड फ्लू से पीड़ित पाए गए थे और उनमें से एक की मौत हो गई थी । वे कुछ समय पहले ही मुख्यभूमि चीन से लौटे थे, जहां उनके एक रिश्तेदार की सांस की किसी बीमारी से मौत हो गई थी, जिसका पता नहीं चला था । हांगकांग में 1997 में इस रोग के पहली बार पता चलने के बाद बर्ड फ्लू के कोई अन्य मानवीय मामले नहीं पाए गए हैं

 

गुरुवार को की गई पुष्टि से चीन में बर्ड फ्लू के सूचित किये गए मामलों की कुल संख्या 20 हो गई है, जिनमें से आधे से ज्यादा घातक थे ।

 

यह रोग मुख्य रूप से पक्षियों को होता है, लेकिन दुनिया भर में 200 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हुए हैं और लगभग सभी को बीमार पक्षियों से संक्रमण हुआ है । वैज्ञानिकों को डर है कि यह विषाणु ऐसी किस्म में परिवर्तित हो सकता है, जो इंसानों के बीच आसानी से फैल सकती है और जिससे लाखों लोगों की मौत हो सकती है । बर्ड फ्लू विशेषज्ञों ने कहा है कि इस रोग पर नजर रखने और विषाणु में संभावित परिवर्तनों का पता लगाने के लिए सभी मानवीय मामलों की पहचान करना जरूरी है ।

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