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इंडोनेशिया अमेरिकी कंपनी के साथ मिलकर बर्ड फ्लू का टीका बनाएगा

08/02/2007

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इंडोनेशियाई सरकार ने ऐलान किया है कि उसने एक अमेरिकी औषधि निर्माता कंपनी के साथ टीका विकसित करने का समझौता किया है, जिसकी वजह से वह बर्ड फ्लू के घातक विषाणु के नमूने अपने पास ही रखेगा । जकार्ता से चैड बाउचर्ड ने रिपोर्ट दी है कि इस कदम से विश्व में बर्ड फ्लू महामारी फैलने की संभावना को रोकने के लिए टीके विकसित करने के अन्य देशों के प्रयासों में बाधा आएगी ।

 

इंडोनेशिया ने इस हफ्ते अमेरिका स्थित दवा निर्माता कंपनी, बैक्सटर इंटरनेशनल के साथ मिलकर बर्ड फ्लू के खिलाफ मानव टीका विकसित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किये ।

 

परंतु पिछले वर्ष के अंत से ही, जब बैक्सटर के साथ समझौता करने पर बातचीत हो रही थी, देश ने एच5एन1 बर्ड फ्लू विषाणु की स्थानीय किस्म के नमूने विदेशी प्रयोगशालाओं या विश्व स्वास्थय संगठन को देने से इंकार करना शुरू कर दिया था ।

 

इंडोनेशिया ने यह नहीं बताया था कि वह विषाणु के नमूने क्यों नही दे रहा । परंतु उसने, थाईलैंड और अन्य विकासशील देशों ने चिंता जताई है कि उनके एच5एन1 के नमूने पश्चिमी देशों को भेज दिए जाएंगे और वहां उनका उपयोग टीके विकसित करने के लिए किया जाएगा, जिन्हें खरीदने की क्षमता मूल देशों के नागरिकों के पास नहीं होगी ।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता डिक थॉमसन ने कहा है कि संगठन के डाटाबेस के लिए  नमूने देना पूर्णतः स्वैच्छिक है और यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इंडोनेशिया के समझौते या मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैन्डिंग का दुनियाभर में एच5एन1 के खिलाफ टीका विकसित करने पर क्या असर पड़ेगा ।

 

"हम इंडोनेशिया या किसा अन्य देश के किसी वैक्सीन कंपनी के साथ समझौता करने के अधिकार का पूरी तरह समर्थन करते हैं । पर मुद्दा यह नहीं है । जब तक समझौते का विवरण या प्रभाव अच्छी तरह समझा नहीं जाता, तब तक हमारे लिए यह पता लगाना संभव नहीं होगा कि यह समझौता वैश्विक फ्लू निरीक्षण कार्यक्रम को किस तरह प्रभावित करेगा ।"

 

दवा निर्माता कंपनी, बैक्सटर के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इंडोनेशिया को समझौते के तहत विषाणु के नमूने देने पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है । इंडोनेशिया का कहना है कि वह भविष्य में नमूने मुहैया करा सकता है ।

 

एच5एन1 विषाणु दुनियाभर में पोल्ट्री में पाया गया है और पिछले 4 वर्षों के दौरान यह 166 लोगों की मौत का कारण बना है । लगभग एक तिहाई मानवीय मौतें इंडोनेशिया में हुई हैं ।

 

एच5एन1 विषाणु अब भी मुख्य रूप से पक्षियों को ही प्रभावित करता है, लेकिन महामारी विशेषज्ञों को आशंका है कि यह विषाणु एक ऐसी किस्म में परिवर्तित हो सकता है, जो आसानी से एक से दूसरे इंसान को प्रभावित कर सकती है, जिससे महामारी फैल सकती है और लाखों लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है ।

 

श्री थॉम्पसन कहते हैं कि विभिन्न देशों से भेजे गए नमूनों से वैज्ञानिकों को विषाणु की उत्पत्ति का पता लगाने और संभावित महामारी के लिए तैयारी करने में मदद मिलती है

 

"यह ऐसा विषाणु है, जो लगातार परिवर्तित होता है और हमारे लिए इन विषाणुओं तक तुरंत पहुंचना जरूरी है, ताकि हम पता लगा सकें कि ये कैसे विकसित हो रहे हैं । दूसरे, विषाणु तक पहुंच होने से हमें संबंधित देशों की निदान करने वाली प्रयोगशालाओं की क्षमताओं की पुष्टि करने में मदद मिलेगी और हम यह पुष्टि कर सकेंगे कि किसी देश की प्रयोगशाला के नतीज़े सही हैं ।"

 

इस साल के आरंभ से कई देशों में, जिनमें विएतनाम, थाईलैंड और जापान शामिल हैं, बर्ड फ्लू फिर से उभरा है । विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महामारी फैलाने वाली कोई किस्म विकसित होती है तो शोधकर्ताओं को  इस रोग के खिलाफ पूरी तरह बचाव करने  का टीका विकसित करने में 6 महीने तक लग सकते हैं ।

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