दक्षिण-पूर्व एशियाई गुट, जेमाह इस्लामिया, जिसे पिछले कुछ वर्षों में हुए कई बम-विस्फोटों के लिए दोषी ठहराया गया है, कई गुटों में विभाजित हो गया है और हो सकता है कि वे नई दिशाओं में बढ़ रहे हों । वी.ओ.ए की संवाददाता नैंसी-एमीलिया कोलिन्स ने इंडोनेशिया के मध्य जावा से जेमाह इस्लामिया के गढ़ से यह रिपोर्ट भेजी है ।
इंडोनेशिया के मध्य जावा द्वीप के इस हिस्से में ज्यादातर लोग भूमि और समुद्र से थोड़ा बहुत पैसा कमाते हैं ।
परंतु तीन भाइयों द्वारा अपने गांव को बदनाम करने के बाद यह क्षेत्र कुख्यात हो गया है । उन्होंने बाली द्वीप में अक्टूबर, 2002 में हुए बम-विस्फोटों को अंजाम देने में मदद की थी । इन विस्फोटों में 202 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर विदेशी पर्यटक थे ।
तीनों भाई तेंगूलुन गांव में रहते थे । अब अमरोज़ी नूर हाशिम और अली गुफरोन को मौत की सजा सुनाई गई है और उनका भाई अली इमरोन उम्र कैद की सजा भुगत रहा है ।
तीनों भाइयों की कट्टरपंथी इस्लामी संगठन, जेमाह इस्लामिया में महत्वपूर्ण भूमिका थी । हालांकि मध्य जावा का यह क्षेत्र आतंकवादी गुट का आध्यात्मिक गढ़ माना जाता है, लेकिन यहां का हर निवासी उसका समर्थक नहीं है ।
32-वर्षीय मलिक तेंगूलुन में पैदा हुआ और बड़ा हुआ है । उसका कहना है कि ये तीनों भाई गांव का प्रतिनिधित्व नहीं करते । उसने कहा कि वह नहीं जानता कि अमरोज़ी और उसके भाइयों ने बाली में आतंकवादी बम-विस्फोट क्यों किये, पर उसका कहना है कि गांव के बहुत सारे लोग इस वजह से उनसे नफरत करते हैं ।
जेमाह इस्लामिया के चरमपंथी गुट का नेता, दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे वांछित आतंकवादी मलेशियाई नुरदीन टॉप है । इस गुट का उद्देश्य पश्चिमी ठिकानों पर हमले करना रहा है, जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मारे गए हैं ।
मुस्लिम धार्मिक नेता अबू बकर बशीर दूसरे गुट का नेता है । उसे 2002 में बाली में हुए बम-विस्फोटों में उसकी कथित भूमिका के लिए 25 महीने तक जकार्ता की जेल में रहना पड़ा था और जून में उसे रिहा किया गया था । इंडोनेशिया के सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर में उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया था ।
69-वर्षीय बशीर पर जेमाह इस्लामिया का आध्यात्मिक नेता होने का आरोप है । वह इस आरोप का खंडन करता है, लेकिन चरमपंथी इस्लाम में अपनी आस्था से इन्कार नहीं करता ।
जकार्ता की मस्जिद में और जावा में और अधिक मस्जिदों में बशीर गैर-मुसलमानों या काफिरों के खिलाफ प्रचार करता है । वह पूरे इंडोनेशिया में, जो विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला धर्मनिरपेक्ष देश है, शरियत या इस्लामी कानून लागू करने की मांग करता है । उसका कहना है कि काफिर हमेशा नर्क में रहेंगे और असुरक्षित रहेंगे, क्योंकि वे धरती पर रहने वाले सबसे बुरे जीव हैं । उसका कहना है कि जो व्यक्ति मुसलमान नहीं है, उसकी कोई इज्जत नहीं होती ।
ज्यादातर इंडोनेशियाई उदारवादी और सहिष्णु इस्लाम का पालन करते हैं, लेकिन बशीर ज्यादातर दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐसा इस्लामी राज्य चाहता है, जहां काफिरों के लिए कोई जगह नहीं है । उसका कहना है कि इस्लाम के अनुसार, काफिरों को आजादी से नहीं रहना चाहिए और इस्लामी कानून के तहत उन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि वे विनाश करेंगे और लोगों को मारेंगे । बशीर का कहना है कि चूंकि काफिरों को जबरन मुसलमान नहीं बनाया जा सकता, इसलिए उन्हें इस्लामी कानून के सामने झुकने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए ।
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने पिछले कुछ वर्षों में 300 से ज्यादा इस्लामी उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है और उन पर मुकदमा चलाया है । इसकी वजह से जेमाह इस्लामिया की गतिविधियों में बाधा पड़ी है, लेकिन यह संगठन जीवित है ।
शोध संगठन, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की दक्षिण एशिया निदेशक सिडनी जोन्स को जेमाह इस्लामिया के एक तीसरे गुट के बारे में चिंता है । उसके सदस्य इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में पोसो क्षेत्र में लड़ रहे हैं, जहां की आबादी ईसाइयों और मुसलमानों में बंटी हुई है ।
2000 और 2001 के बीच गुटीय हिंसा में करीब 1,000 लोगों के मरने के बाद हाल ही तक पोसो में काफी शांति थी, लेकिन पुलिस द्वारा मुस्लिम उग्रवादियों को पकड़ने के लिए छापे मारे जाने के बाद यहां हुई हिंसा में 17 लोग मारे गए ।
जेमाह इस्लामिया एक विभाजित संगठन है, लेकिन यह लचीला और जुझारू भी है । विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंडोनेशिया के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक समाज तथा इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है ।