(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
इंडोनेशिया सरकार बर्ड फ्लू के एच5एन1 विषाणु के नमूने विश्व स्वास्थ्य संगठन को देने पर राजी हो गई है, क्योंकि राष्ट्र संघ एजेंसी ने कहा है कि वह फ्लू की महंगी दवाइयों के खिलाफ इंडोनेशिया के हितों की रक्षा करेगी ।
इस बारे में यह विवाद इस साल के शुरू में पैदा हुआ था और विश्व स्वास्थ्य संगठन और जकार्ता के बीच समझौता होने के बाद इंडोनेशिया ने बर्ड फ्लू के नमूने फिर से देने का फैसला किया ।
जकार्ता में एक दर्जन से ज्यादा देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच हुई बैठक में यह समझौता हुआ । यह बैठक बर्ड फ्लू के एच5एन1 विषाणु के प्रसार को रोकने के काम में तालमेल बिठाने के लिए आयोजित की गई थी ।
इंडोनेशिया ने इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन को विषाणु के नमूने भेजना बंद कर दिया था, जब एक ऑस्ट्रेलियाई दवा निर्माता कंपनी ने इंडोनेशिया की जानकारी के बिना उसके विषाणु की किस्म को टीका विकसित करने के लिए इस्तेमाल किया ।
जकार्ता को आशंका है कि उसके विषाणु के नमूनों को ऐसे टीके बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जो इंडोनेशिया जैसे गरीब देश खरीद नहीं सकेंगे ।
मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर सहमत हो गया कि वह दवा बनाने वाली कंपनियों को तब तक विषाणु के नमूने नहीं देगा, जब तक कि नमूने देने वाला देश इसकी अनुमति नहीं देता । बुधवार को तीन-दिवसीय बैठक समाप्त होने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंडोनेशिया ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये ।
इंडोनेशिया की स्वास्थ्य मंत्री सिती फादीलाह सुपारी ने कहा है कि अब जकार्ता संतुष्ट है । उन्होंने कहा कि चूंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन नमूने देने वाले देशों की अनुमति के बिना दवा कंपनियों को विषाणु के नमूने न देने पर सहमत हो गया है, इसलिए जकार्ता तुरंत नमूने भेजना शुरू कर देगा ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के संक्रमणीय रोगों के लिए सहायक महानिदेशक, डेविन हेमान का कहना है कि गरीब देशों के भी अमीर देशों के समान अधिकार होने चाहिए । उन्होंने कहा कि औद्योगिक देश लगातार टीकों के लिए लेन-देन की बातचीत करते हैं और उनके पास इसका ढेर है और वे टीके हासिल कर लेते हैं । ऐसा कोई कारण नहीं है कि विकासशील देशों को ऐसा नहीं करना चाहिए ।
उधर जकार्ता ने एच5एन1 विषाणु से 3 और मौतें होने की घोषणा की है । इंडोनेशिया में बर्ड फ्लू से 63 लोगों की मौत की पुष्टि पहले ही हो चुकी है ।
इस विषाणु के 2003 में फिर से उभरने के बाद से 1 दर्जन देशों में 280 से ज्यादा मौतें हुई हैं । ज्यादातर संक्रमण दक्षिण-पूर्व एशिया में हुए हैं । इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं ।