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इंडोनेशियाई स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि टीका बनाने के लिए बर्ड फ्लू के नमूनों का आदान-प्रदान करने के बारे में अगले हफ्ते एक नया अंतर्राष्ट्रीय समझौता होने की आशा है ।
इंडोनेशिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच फरवरी से बातचीत चल रही है । सवाल यह है कि क्या इंडोनेशिया को पश्चिमी औषधि कंपनियों की रिसर्च के लिए एच5एन1 बर्ड फ्लू विषाणु के अपने नमूने देने चाहिए ।
इंडोनेशियाई स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अमीर देश इंडोनेशिया के नमूनों का इस्तेमाल करके पेटेंट से भारी मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि इंडोनेशिया अपने इस्तेमाल के लिए इन महंगे टीकों को नहीं खरीद सकता ।
एच5एन1 विषाणु की इंडोनेशियाई किस्म विशेष रूप से घातक है । फरवरी में एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने जकार्ता से सलाह किये बिना इसका इस्तेमाल व्यावसायिक टीका बनाने के लिए किया था ।
इंडोनेशिया के स्वास्थ्य विभाग के शोध एवं विकास अध्यक्ष त्रियोनो सुंदोरो ने कहा कि ऐसे कार्यों से अंतर्राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होता है, जिनके अनुसार किसी देश के नमूनों को टीके बनाने और उनको पेटेंट कराने से पहले उस देश की मंजूरी लेना जरूरी है ।
उन्होंने कहा कि कंपनियों को भारी मुनाफा नहीं कमाना चाहिए, जबकि जिन लोगों को इन दवाइयों की जरूरत है, वे पैसे की कमी के कारण उन्हें खरीद नहीं पाते ।
इंडोनेशिया और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच नमूने बांटने पर मार्च में समझौता हो गया था, लेकिन इंडोनेशिया ने नमूने देने पर रोक जारी रखी । उसका कहना है कि वह पहले अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से औपचारिक गारंटी चाहता है कि उसके नमूनों से बनाए गए टीके उसकी पहुंच के भीतर होंगे ।
मंगलवार को जकार्ता में इंडोनेशियाई अधिकारियों ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें आशा है कि अगले हफ्ते जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान ऐसा समझौता हो जाएगा ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के बर्ड फ्लू के कार्यकारी टीम के नेता न्यूमेन कुमारा राय ने कहा है कि उनके संगठन को इंडोनेशिया की चिंताओं से सहानुभूति है ।
उन्होंने कहा कि बहुत से सदस्य देश भी इंडोनेशिया की चिंताओं को सही मानते हैं और हमें विश्वास है कि अंततः हम ऐसा समाधान खोज लेंगे, जिससे बर्ड फ्लू के टीके का समान वितरण हो सकेगा ।
मंगलवार को इंडोनेशिया ने एच5एन1 विषाणु से 75वीं मौत होने की पुष्टि की थी । इनमें इस साल हुई 18 मौतें भी शामिल हैं । दुनिया में बर्ड फ्लू से सबसे ज्यादा मौत इंडोनेशिया में हुई है ।
ज्यादातर इंसानों को यह विषाणु पक्षियों के सम्पर्क में आने से लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों को चिंता है कि यह विषाणु ऐसी किस्म में परिवर्तित हो सकता है, जो एक से दूसरे इंसान को संक्रमित कर सकती है । ऐसा हुआ तो विश्व स्तर पर महामारी फैल जाएगी और लाखों लोग मारे जाएंगे ।