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एशिया में बर्ड फ्लू

03/09/2007

A chicken vendor waits for customers at a market in Jakarta, 16 August 2007
A chicken vendor waits for customers at a market in Jakarta,
वैज्ञानिकों को निश्चित तौर पर यह पता नहीं है कि क्या जंगली पक्षी बर्ड फ्लू का विषाणु फैला रहे हैं ।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययनों से यह पुष्टि नहीं होती कि जंगली पक्षी बर्ड फ्लू के एच5एन1 विषाणु के वाहक होते हैं या नहीं । वी.ओ.ए के लुइस रमिरेज ने बैंकॉक से खबर दी है, जहां इस हफ्ते विशेषज्ञ इस रोग के प्रसार का पता लगाने के बारे में बेहतर रास्ते तलाशने के लिए बैठक कर रहे हैं ।

बैंकॉक में बैठक करने वाले विशेषज्ञों ने कहा है कि वे जिस जानकारी के आधार पर काम कर रहे थे, हो सकता है कि वह विश्वसनीय न हो, क्योंकि जंगली पक्षियों में एच5एन1 संक्रमण की जांच करने का कोई समान तरीका नहीं है । खाद्य एवं कृषि संगठन ने 12 देशों के 70 से ज्यादा विशेषज्ञों की बैठक आयोजित की है ।

खाद्य एवं कृषि संगठन के अंतर्राष्ट्रीय वन्य जीवन समन्वयक, स्कॉट न्यूमेन का कहना है कि इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन देशों को जंगली पक्षियों की निगरानी में सुधार करने के लिए किस तरह की सहायता और प्रशिक्षण की जरूरत है ।

"हमें पता चला है कि अगर जंगली पक्षी स्वस्थ और उन्मुक्त उड़ान भरने वाले पक्षी हैं, तो उनमें संक्रमण का पता नहीं चलता । हालांकि हमें यह भी जानकारी मिली है कि विभिन्न देशों में जंगली पक्षी मृत पाए जा रहे हैं और उनमें एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है, इसलिए निरीक्षण के लिहाज से कुछ देश जंगली पक्षियों का अच्छा निरीक्षण कर रहे हैं । अन्य केवल मृत पक्षियों को जमा कर रहे हैं और रोग का पता लगा रहे हैं । इसलिए बहुत तरह की निरीक्षण गतिविधियां और निगरानी हो रही है ।"

बर्ड फ्लू विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि प्रवासी जंगली पक्षियों के बीच बर्ड फ्लू की कोई महत्वपूर्ण घटना न हुई हो, या ऐसा भी हो सकता है कि विषाणु का पता न चल रहा हो । उनका कहना है कि इसका पता लगाने का एकमात्र तरीका निरीक्षण का व्यापक और एकसमान तंत्र स्थापित करना है ।

खाद्य एवं कृषि संगठन के अधिकारियों ने पिछले साल चिंता जताई थी कि प्रवासी पक्षियों के कारण एशिया और यूरोप से अफ्रीका में रोग फैला होगा । परंतु जैसा कि दुनिया में अन्यत्र हुआ है, अफ्रीका में जंगली पक्षियों के बीच बहुत कम मामले पाए गए हैं ।

वन्य जीवन संरक्षण सोसायटी के फील्ड वैटेरीनरी प्रोग्राम डायरेक्टर विलियम कारेश बैंकॉक की बैठक में भाग ले रहे हैं ।

"हमने अफ्रीका में, नाईजीरिया में और उन क्षेत्रों में हजारों पक्षियों की जांच की है और हमें किसी जंगली पक्षी में रोग नहीं मिला । इसका अर्थ यह नहीं है कि यह कभी-कभार उन्हें नहीं हो सकता, लेकिन शायद इससे कोई लाभ नहीं होगा । इससे आगे कोई रास्ता नहीं है ।"

श्री कारेश कहते हैं कि अफ्रीका और विश्व के अन्य भागों में वन्य जीवन के अवैध व्यापार की वजह से विषाणु का पता लगाना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है ।

2003 में महामारी फैलने के बाद विश्व में लाखों चूजों, बत्तखों, हंसों में यह विषाणु फैल गया था और लाखों अन्य पक्षियों को इसका प्रसार रोकने के लिए मार दिया गया था ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि 12 देशों में 320 से ज्यादा लोग बर्ड फ्लू से पीड़ित हुए हैं और करीब 200 की मौत हो गई है ।

इंडोनेशिया और वियतनाम में करीब दो-तिहाई मानवीय मामले हुए हैं ।

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