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बर्ड फ्लू- नवीनतम स्थिति

19/12/2007

Two migratory birds found coated with crude oil at the Mallipo beach, west of Seoul, 09 Dec 2007
Two migratory birds found coated with crude oil at the Mallipo beach, west of Seoul, 09 Dec 2007
111 देशों के प्रतिनिधि दिसंबर के पहले हफ्ते में बर्ड फ्लू से मुकाबला करने में हुई प्रगति और इंसान में फ्लू की महामारी फैलने की तैयारी का आकलन करने के लिए नई दिल्ली, भारत में मिले । इस प्रयास का नेतृत्व कर रहे दो जन स्वास्थ्य अधिकारियों ने वॉशिंगटन में एक न्यूज़ ब्रीफिंग में सम्मेलन के परिणामों का संक्षिप्त विवरण दिया । जैसा कि फेथ लेपीडस ने बताया, उन्होंने प्रगति होने की जानकारी दी पर कहा कि अभी लंबा रास्ता तय करना होगा ।

 

1996 में एशिया में बर्ड फ्लू के विषाणु का पहली बार निदान होने के बाद से करीब 60 देशों में लाखों संक्रमित पक्षियों का विनाश हो चुका है । तथाकथित एच5एन1 विषाणु से संक्रमित होने के बाद 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है ।

 

राष्ट्र संघ के एवियन एंड ह्यूमन इनफ्लूएंजा के लिए वरिष्ठ समन्वयक डेविड नाबारो के अनुसार, बर्ड फ्लू ऐसी समस्या है, जो आने वाले कुछ वर्षों तक हमारे लिए बनी रहेगी । परंतु श्री नाबारो ने 146 देशों से एच5एन1 विषाणु के प्रसार के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए आशावादी होने पर जोर दिया ।

 

पहली बात तो यह है कि 2004 और 2007 के बीच स्थिति बदल गई है, जिस दर से नए देश एच5एन1 से प्रभावित हो रहे हैं, उसमें कमी आई है, मानवीय मामलों की संख्या कम हुई है और मानवीय मौतें भी कम हो गई हैं । इसलिए व्यापक महामारी विज्ञान से संबंधित प्रमाण से संकेत मिला है कि एच5एन1 विषाणु की स्थिति कम-से-कम इतनी गंभीर नहीं है ।

 

परंतु कम-से-कम 6 देशों में यह विषाणु अब भी फैल रहा है और बर्मा तथा पाकिस्तान में मानवीय संक्रमण और मौत की नई खबरें (16 दिसंबर) मिली हैं । वॉशिंगटन ब्रीफिंग में श्री नाबारो ने एच5एन1 को नियंत्रण में रखने के लिए ध्यान केंद्रित करने, अनुदान देने और राजनीतिक इच्छाशक्ति बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया ।

 

और जॉन लेंग ने, जो अमेरिकी सरकार के एवियन इनफ्लूएंजा प्रोग्राम के अध्यक्ष हैं, पत्रकारों को बताया कि बर्ड फ्लू को रोकने का वैश्विक अभियान व्यक्तिगत मामलों से निपटने से आगे तक जाता है ।

 

हम, जहां तक संभव होता है, पशु चिकित्सा के क्षेत्र में और मानवीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरीक्षण का स्तर बढ़ाकर, पशु चिकित्सकों और महामारी वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करके, प्रयोगशालाएँ आदि बनाकर दीर्घकालिक क्षमता का निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं ।

 

और श्री लेंग ने कहा कि बर्ड फ्लू पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समग्र जन-स्वास्थ्य की तैयारी पर सकारात्मक असर पड़ा है ।

 

अगर कोई ऐसी नई बीमारी होती, जो कल ही उभरी होती, लेकिन एच5एन1 से पूरी तरह अलग होती, हो सकता है कि कुछ ऐसी बीमारी होती, जिसमें इंसान से इंसान को संक्रमित करने की प्रभावशाली क्षमता होती तो इसका मुकाबला करने का सर्वोत्तम उपाय इसी तरह के नेटवर्क बनाना होता, जो अब एवियन और पेंडमिक इनफ्लूएंजा के खतरों से निपटने के लिए बनाए जा रहे हैं ।

 

श्री लेंग ने सरकारों में और उनके बीच भी ऐसे नेटवर्क बनाने के महत्व पर जोर दिया । उन्होंने महामारी से निपटने के लिए वॉशिंगटन के समग्र रवैये का उल्लेख किया । श्री लेंग ने कहा कि इसमें सरकार की हर एजेंसी शामिल है, केवल जन-स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार एजेंसियां ही शामिल नहीं हैं ।

 

एक गंभीर महामारी में हर एक को शामिल होना पड़ेगा । इसमें ऐसी कठिनाइयां आ सकती हैं कि जब आप एटीएम मशीन पर जाएं और उसमें पैसा इसलिए न भरा गया हो क्योंकि बीमारी की वजह से लोग काम पर न आए हों और इसमें पैसा न भर सके हों । इससे हमारी वित्तीय प्रणालियां प्रभावित होंगी, इससे इंटरनेट प्रभावित होगा । हो सकता है कि हर कोई कुछ समय के लिए काम पर न जाकर घर पर रह जाएं और इंटरनेट का इस्तेमाल करे । ऐसी बहुत सारी जटिलताएं हो सकती हैं, जो स्वास्थ्य और मानवीय सेवा विभाग के कार्य क्षेत्र से बाहर हों या विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्र से बाहर हों । इसलिए हालांकि यह मानवीय स्वास्थ्य का खतरा है, पर अगर महामारी फैलती है तो इस पर सचमुच व्यापक तालमेल की जरूरत पड़ेगी । इसमें सब कुछ शामिल होगा ।

 

और राष्ट्र संघ के डेविड नाबारो ने कहा कि चूंकि एवियन फ्लू महामारी का प्रभाव इतना व्यापक होगा, इसलिए स्थानीय समुदायों, नागरिक संगठनों और सार्वजनिक सुविधाओं को भी इसकी तैयारी करने में भूमिका निभानी होगी ।

 

इन खतरों से निपटने की क्षमता केवल सरकारों के कार्य से नहीं आएगी । यह समुदायों में प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने से आएगी ताकि वे न केवल पशुओं से होने वाले रोगों के खतरों से निपट सकें, बल्कि ऐसी स्थितियों में जन सेवाएं जारी रखने में भी सक्षम हो सकें ।

 

युद्ध और विश्व का तापमान बढ़ने से होने वाले खतरों को स्वीकार करते हुए श्री डेविड नाबारो ने जोर देकर कहा कि आज मानवता के सामने जो सबसे बड़ा खतरा है, वह इतना छोटा है कि लगभग दिखाई नहीं देता ।

 

ये सूक्ष्म जीवाणु हैं, खासकर वे जीवाणु जो पशु जगत से आते हैं- मानवता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक हैं और यहां तक कि उसके अस्तित्व के लिए भी निश्चय ही खतरा हैं ।

 

बर्ड फ्लू से मुकाबला करने के वैश्विक प्रयासों पर चर्चा काहिरा में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में जारी रहेगी, जो अक्टूबर में होगा

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