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ईरान द्वारा तुर्कमेन अल्पसंख्यकों का दमन जारी

17/02/2008

मानवाधिकारों पर निगरानी रखने वाले,  ईरानी अधिकारियों द्वारा सैकड़ों जातीय तुर्कमेन की गिरफ्तारी की खबरों को लेकर चिंतित   हैं । 28 दिसंबर को ईरान के समुद्री सुरक्षा अधिकारियों के हाथों एक जातीय तुर्कमेन मछुआरे हुसाहमेतीन काहदीवर की हत्या हो गई   थी । इस घटना के बाद ये गिरफ्तारियां हुई हैं ।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान की आबादी के करीब दो प्रतिशत लोग यानी तेरह लाख से अधिक लोग तुर्कमेन मूल के हैं ।

श्री काहदिवर ईरान के शहर बॉनदहर-ई तोर्कमॉन के पास कैस्पियन सागर में बगैर लाइसेंस के मछली पकड़ रहे थे । अब्दुलगफूर सेहतेश ईरान मामलों के सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स फॉर तुर्कमेनिस्तान के निदेशक हैं । कनाडा में मानवाधिकार मामलों पर नजर रखने वाले इस संगठन के श्री सेहतेश ने कहा है कि युवा मछुआरों के मित्रों और सगे-संबंधियों ने इस हत्या की शिकायत ईरान के सैन्य अधिकारियों से की ।

“दो दिन के शोक के बाद चार या पांच सौ लोग चहपहक्ली स्थित सैन्य ठिकाने पर गए और उनसे सवाल किया । उन्होंने उनसे पूछा कि यह 18 साल का एक युवक है, आपने उसे क्यों मारा । अब उसके परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है । जैसा कि आमतौर पर ईरानी अधिकारी करते हैं, वे उन्हें भी पीटने लगे ।


श्री सेहतेश ने कहा कि ईरान के सुरक्षा बलों ने भीड़ पर धावा बोल दिया । एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, दर्जनों तुर्कमेनी प्रदर्शनकारियों को घायल कर दिया गया और दो सौ से तीन सौ लोगों को इस क्षेत्र के गांव से गिरफ्तार कर लिया । एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि एक खबर के अनुसार, लोगों को उनकी गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया गया । उसके अनुसार, खबर है कि अगर सैकड़ों तुर्कमेनियों को नहीं तो कम-से-कम बीसियों को सिस्तान-बलुचिस्तान प्रांत के ज़ाहेदान ले जाया गया । ऐसा संभवतः इसलिए किया गया ताकि उनके परिवारों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाए कि उनके साथ क्या किया गया । एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि समझा जाता है कि गिरफ्तार किये गए लोगों में से दो, जमशीद अराज़पुर और हाजी अमन कहादिवर को गोलिस्तान प्रांत में गोपनीय स्थान पर रखा गया है और ऐसी आशंका है कि उन्हें यातना दी जाएगी । 

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा- ईरान के हुक्मरान अच्छे एवं प्रतिभाशाली लोगों का दमन करते हैं । ईरान की जनता को अमेरिका ने साफ संदेश दिया है कि हमारा उनसे कोई झगड़ा नहीं   है । हम आपकी परंपराओं और इतिहास का सम्मान करते हैं । हमें उस दिन का इंतजार है, जब आप को आजादी मिलेगी ।

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