(वी.ओ.ए न्यूज़)
भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की प्रक्रिया में हाइड एक्ट को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच अमेरिका ने आज यह संकेत दिया है कि भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग के समझौते के क्रियान्वयन में घरेलू कानून हाइड एक्ट को ध्यान में रखना जरूरी है ।
अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर ने भारत में पत्रकारों से कहा कि हाइड एक्ट एक घरेलू कानून है और 123 समझौता एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है । मैं समझता हूं कि हम लगातार दोनों को साथ लेकर चल सकते हैं ।
भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत के बाद श्री बाउचर ने एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की । पत्रकारों ने उनसे पूछा कि भारत-अमेरिकी परमाणु सहयोग के मामले में हाइड एक्ट का क्या प्रभाव पड़ेगा ।
वामपंथी पार्टियों एवं देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भाजपा ने यह आशंका जताई है कि परमाणु समझौते पर हाइड एक्ट बाध्यकारी होगा । हालांकि भारत सरकार यह कह रही है कि इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा । श्री बाउचर ने उनकी इन आशंकाओं के बीच ही यह बयान देकर स्थिति को जटिल बना दिया है ।
पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा था कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के दिशा-निर्देशों में जो बदलाव होंगे, वे पूरी तरह हाइड एक्ट के दायित्वों के अनुरूप होंगे । उल्लेखनीय है कि भारत को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से परमाणु से जुड़ा कारोबार करना होगा । उनके इस बयान ने इन आशंकाओं को और बल दे दिया था ।
उन्होंने कहा था कि अगर भारत का रुख हाइड एक्ट के विरुद्ध हुआ तो अमेरिका भारत का समर्थन नहीं करेगा ।
लेकिन यहां की सरकार लगातार यह कह रही है कि वह हाइड एक्ट से बंधी हुई नहीं है ।
विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कल संसद में इशारे से सुश्री राइस की टिप्पणी पर सवाल खड़ा किया । उन्होंने कहा कि नागरिक परमाणु सहयोग के मामले में भारत के अधिकार र दायित्व सिर्फ 123 समझौते में ही निहित हैं ।