(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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| Aung San Suu Kyi, left, talks with U.N. Special Envoy Ibrahim Gambari during their meeting at the state guest house in Yangon |
दौरे पर आए राष्ट्र संघ के दूत इब्राहिम गाम्बरी ने बर्मा की नजरबंद विपक्षी नेता आंग सान सू ची के साथ बात की । पिछले तीन दिनों में सुश्री सू ची के साथ उनकी यह दूसरी मुलाकात है । राष्ट्र संघ के राजनयिक बर्मा की सैन्य सरकार पर आने वाले चुनावों में सुश्री सू ची की पार्टी को भी शामिल करने का दबाव बना रहे हैं । लेकिन हांगकांग से नओमी मार्टिग की रिपोर्ट के अनुसार, बर्मा के अधिकारियों ने अभी तक इससे इन्कार किया है ।
राष्ट्र संघ के अधिकारियों ने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने इब्राहिम गाम्बरी से रंगून स्थित एक सरकारी भवन में करीब 45 मिनट तक बातचीत की । श्री गाम्बरी गुरुवार को बर्मा पहुंचे हैं और उन्हें सुश्री ची एवं उनकी पार्टी, नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के नेताओं से शनिवार को भी मिलने दिया गया था ।
श्री गाम्बरी का बर्मा आने का लक्ष्य है सैन्य सरकार को सुश्री ची के साथ बातचीत के लिए राजी करना । वे सरकार को इस बात के लिए भी राजी करने आए हैं कि वह उन्हें राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने दें । लेकिन इस दिशा में उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली है ।
बर्मा के नेताओं ने फरवरी की शुरुआत में यह घोषणा की कि वह मई महीने में संविधान के मसौदे पर एक जनमत संग्रह कराएंगे एवं वर्ष 2010 में आम चुनाव होगा । लेकिन संविधान के मसौदे के अनुसार, विदेशी से शादी करने वाला बर्मा का कोई नागरिक किसी पद की दौड़ में शामिल नहीं हो सकता । इस प्रावधान के जरिये सैन्य सरकार इस मामले में सुश्री सू ची को रोकने में सफल रही है, क्योंकि उन्होंने ब्रिटेन के एक व्यक्ति से शादी की थी । करीब एक दशक पहले उनके पति कैंसर से मर चुके हैं । बर्मा के अधिकारियों ने उस प्रावधान में संशोधन करने से इन्कार किया है ।
शनिवार को बर्मा की सरकार ने संविधान पर होने वाले जनमत संग्रह के दौरान स्वतंत्र चुनाव प्रेक्षकों को भेजने के राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है ।
रोशन जैसन आसियान के अंतर-संसदीय म्यांमार कॉकस के कार्यकारी निदेशक हैं । उनका कहना है कि बर्मा द्वारा हर अंतर्राष्ट्रीय सलाह को ठुकराया जाना कोई नई बात नहीं है । उन्होंने कहा कि सैन्य सरकार के इस रवैये के प्रति राष्ट्र संघ को कड़ा कदम उठाना होगा । राष्ट्र संघ को यह समझना होगा कि उनके साथ किसी बातचीत या संवाद का कोई सकारात्मक नतीजा नहीं होने वाला । इन रास्तों से मामला आगे नहीं बढ़ने वाला ।
जैसन ने कहा कि बर्मा के साथ बातचीत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि राष्ट्र संघ के अधिकारी कड़ा रुख अपनाए । उन्होंने कहा कि राष्ट्र संघ को कड़े शब्दों वाला प्रस्ताव पारित करना होगा ताकि चुनाव के समय प्रेक्षकों को भेजने एवं बर्मा में बातचीत के लिए बान की-मून के कार्यालय के एक स्थायी प्रतिनिधि को रखने के प्रस्तावों को अहमियत मिले ।
पिछले 18 सालों में सुश्री सू ची 12 वर्ष से अधिक समय तक कैद रही हैं । वर्ष 1990 में हुए राष्ट्रीय चुनावों में उनकी पार्टी को जीत हासिल हुई थी, लेकिन सेना ने इन नतीजों को मानने से इन्कार कर दिया था ।
आने के बाद से श्री गाम्बरी कई सरकारी अधिकारियों, विदेशी राजनयिकों और अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस के स्थानीय प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं ।
गत् सितंबर महीने में लोकतंत्र के समर्थन में हुए विरोध को वहां की सरकार ने कठोरता से दबा दिया । तब से लेकर श्री गाम्बरी तीसरी बार बर्मा की यात्रा कर चुके हैं । राष्ट्र संघ के अधिकारियों का कहना है कि सितंबर में दमन के दौरान 30 से अधिक लोग मारे गए थे ।