(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
शुक्रवार को ल्हासा में हिंसा होने की खबर मिली है और तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान शहर के केंद्र में जगह-जगह आग लगी हुई है । बीजिंग से वी.ओ.ए संवाददाता स्टीफेनी हो ने खबर दी है कि इस शहर में विरले ही सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों की गति बढ़ती हुई दिखाई दे रही है ।
प्रत्यक्षदर्शियों ने ल्हासा की बार्कर स्ट्रीट पर जोखांग मठ के पास, जिसे तिब्बती बौद्ध अपना एक सबसे पवित्र स्थल मानते हैं, कम-से-कम एक बाजार के लपटों में घिरे होने की जानकारी दी ।
वाहन भी जलाए गए । चीन की सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने खबर दी है कि हिंसा में लोग घायल हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया ।
बीजिंग में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकियों को सलाह देते हुए गोलीबारी और अन्य हिंसा के कारण ल्हासा से दूर रहने के लिए कहा है ।
पिछले कुछ दिनों में तिब्बती राजधानी में तनाव बढ़ गया है और हजारों पुलिसकर्मियों तथा हथियारबंद सैनिकों ने शहर के तीन सबसे बड़े मठों को सील कर दिया है । तिब्बत में चीन के खिलाफ सोमवार को 20 वर्षों में सबसे बड़ा आंदोलन शुरू हुआ, जब भिक्षुओं ने चीनी शासन के खिलाफ असफल आंदोलन की 49वीं वर्षगांठ मनाने के लिए मार्च करने की कोशिश की ।
श्री जान विलेम डेन बेस्टन एक सलाहकार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय तिब्बत अभियान के यूरोपीय कार्यालय में हैं । उनका कहना है कि हाल में हुई हिंसा इसका संकेत है कि चीनी शासन से नाराज तिब्बतियों की संख्या बढ़ती जा रही है ।
उन्होंने कहा कि यह लोगों की निराशा और इस तथ्य का प्रतीक है कि लोग जानते हैं कि ओलंपिक खेलों से पहले विश्व की निगाहें चीन पर टिकी हैं, इसलिए लोग तिब्बत की स्थिति पर अपनी कुंठा को जाहिर करने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल कर रहे हैं । विशेषकर पिछले 10 वर्षों में यहां की स्थिति बहुत खराब रही है ।
उन्होंने कहा कि उनके विचार में इन प्रदर्शनों से यह उद्देश्य पूरा होता है कि दुनिया भर के लोगों को पता चले कि तिब्बत की स्वायत्तता का मुद्दा जीवित है । परंतु उनका कहना है कि उन्हें चीनी प्रतिक्रिया की चिंता भी है ।
श्री डेन बेस्टन ने कहा कि जाहिर है कि हम बहुत डरे हुए हैं कि प्रदर्शनकारियों का कठोरता से दमन किया जा सकता है । पिछले कुछ वर्षों में पुलिस की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नर्म रही है । इसलिए हम बहुत चिंतित हैं कि अब अधिक कठोर दमन होगा
इस हफ्ते के शुरू में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता किम गांग ने कहा था कि सोमवार को शुरू हुआ मार्च, जिससे नवीनतम प्रदर्शन भड़के थे, गैरकानूनी कदम है ।
उसने कहा कि चीनी न्यायपालिका और कानून लागू करने वाले अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था की रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे ।
बीजिंग का कहना है कि तिब्बत ऐतिहासिक रूप से चीन का हिस्सा रहा है, पर बहुत से तिब्बती तर्क देते हैं कि हिमालय का यह क्षेत्र सदियों तक आजाद रहा और उनका आरोप है कि चीन तिब्बती संस्कृति को कुचलने की कोशिश कर रहा है ।
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं । वह चीनी अधिकारियों के साथ तिब्बत को स्वायत्तता देने के बारे में बातचीत कर रहे हैं ।