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स्वर्गीय भुट्टो के पति के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बनने की आखिरी कानूनी बाधा दूर

14/03/2008

Asif Ali Zardari, widower of slain opposition leader Benazir Bhutto presides over the party Central Executive Committee meeting at his residence in Islamabad, 19 Feb 2008
(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)

स्वर्गीय पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के पति ने एक और बाधा पार कर ली है, जिससे वह उस पद तक पहुंच सकते हैं, जो पहले कभी उनकी स्वर्गीय पत्नी के पास था ।

 

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली ज़रदारी के खिलाफ लगा आखिरी भ्रष्टाचार का आरोप खारिज कर दिया गया है । यह मामला एक जर्मन-निर्मित लक्जरी कार का आयात बिना शुल्क दिये करने से संबंधित था ।

 

इस महीने के शुरू में पाकिस्तानी अदालतों ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के छह अन्य मामले खारिज कर दिये थे । पिछले वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के बीच समझौता हुआ था, जिसके तहत यह सहमति बनी थी कि उनके पति के खिलाफ भ्रष्टाचार के छह अन्य आरोपों को उनकी सरकार खारिज कर देगी ।

 

अदालती कार्रवाई समाप्त होने से श्री ज़रदारी के सरकारी पद पर आने और अपनी पत्नी, जिनकी हत्या कर दी गई थी और उनके पिता, जिन्हें एक सैन्य क्रांति में सत्ता से हटाया गया था और फांसी दे दी गई थी, के पदचिह्नों पर चलने की कानूनी बाधा दूर हो गई है  

 

श्री ज़रदारी के वकील फारूक नाइक ने शुक्रवार को रावलपिंडी में पत्रकारों को बताया कि श्री ज़रदारी के खिलाफ विदेशों में विचाराधीन मामले, जो भ्रष्टाचार-विरोधी राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने दायर किये थे, अब खारिज कर दिये जाएंगे ।

 

उन्होंने कहा कि सिंध उच्च न्यायालय ने कराची में पाकिस्तान के महाधिवक्ता और राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के अधिकारियों को लंदन और जिनेवा में उनके खिलाफ विचाराधीन मामले वापस लेने का आदेश दिया है और उन्हें इस महीने की 21 तारीख से पहले ऐसा करना होगा । ऐसा न करने पर उन पर अदालत की अवमानना और अवज्ञा करने का आरोप लगाया जा सकता है ।

 

श्री ज़रदारी और स्वर्गीय श्रीमती भुट्टो, दोनों ने ही स्विटज़रलैंड और स्पेन में भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना किया था । उनके समर्थक लंबे समय से कहते रहे हैं कि ये सभी मामले राजनीति से प्रेरित थे ।

 

श्री ज़रदारी अपनी पत्नी के दूसरे कार्यकाल में सरकारी मंत्री थे । उन्होंने विभिन्न आरोपों में आठ वर्ष से ज्यादा समय जेल में बिताया था, लेकिन उन्हें कभी अभियुक्त करार नहीं दिया गया ।

 

कुछ समय पहले श्री ज़रदारी ने प्रधानमंत्री बनने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी । अब उन्हें इस पद के लिए सबसे बड़ा प्रतियोगी माना जा रहा है । उनकी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पिछले महीने हुए संसदीय चुनावों में अन्य सब पार्टियों से आगे रही थी । उसके बाद उसने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग पार्टी के साथ सत्ता में साझेदारी करने का समझौता किया । इस समझौते के तहत प्रधानमंत्री मनोनीत करने का अधिकार पाकिस्तान पीपल्स पार्टी को है ।

 

श्री ज़रदारी ने फरवरी में चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन उनके मई में संसदीय उप चुनाव लड़ने की संभावना है, जिससे वह प्रधानमंत्री बनने के योग्य हो जाएंगे ।

 

राष्ट्रीय असेंबली का गठन सोमवार को इस्लामाबाद में होगा । समझा जाता है कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी एक अंतरिम उम्मीदवार पेश करेगी, जो केवल तब तक पद पर रहेगा, जब तक कि श्री ज़रदारी इस पद पर आसीन होने योग्य नहीं हो जाते ।

 

श्री ज़रदारी की पत्नी की हत्या 27 दिसंबर को राजनीतिक रैली के बाद हुई थी । उस समय वह फिर प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे थीं ।

 

पिछले महीने हुए चुनावों के नतीजे से साफ हो गया है कि पूर्व जनरल कितने अलोकप्रिय हो गए हैं । श्री मुशर्रफ का समर्थन करने वाले प्रत्याशियों को भी हार का सामना करना पड़ा ।

 

परंतु बहुत से पाकिस्तानी श्री ज़रदारी को भी अच्छा नेता नहीं मानते । बेनज़ीर भुट्टो के कार्यकाल में उन्हें मि. 10 परसेंट कहा जाने लगा था, क्योंकि 1990 के दशक में, जिसमें देश लगभग दीवालिया हो गया था, उन पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया जाता था ।

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