(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
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न ने शुक्रवार को ल्हासा में हुए दंगों में मृतकों की अधिकृत संख्या बढ़ा दी है । चीनी शासन के खिलाफ तिब्बत में कई दिन तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने के बाद हिंसा भड़कने पर ये मौतें हुईं । चीनी अधिकारी अब स्वीकार कर रहे हैं कि 13 लोगों की मौत हुई है । उधर चीन सरकार तिब्बत के निर्वासित धर्म गुरु दलाई लामा के खिलाफ मौखिक युद्ध तेज कर रही है ।
ल्हासा में बिजली वापस आ गई है और चीनी अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने शहर में सुरक्षा बहाल कर दी है । चीन सरकार ने एक स्थानीय तिब्बती चंपा फुंतसोक को तिब्बत का गवर्नर नियुक्त किया है । उन्होंने बीजिंग में पत्रकारों को बताया कि शुक्रवार को तिब्बती दंगाइयों ने हिंसा शुरू की, जिसमें 13 निर्दोष लोग मारे गए । उन्होंने कहा कि दंगे देश को तोड़ने के लिए, एकता खंडित करने के लिए तथा तिब्बत की सामाजिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के लिए किये गए थे ।
तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा चीन के भीतर ही इस हिमालयी क्षेत्र को स्वायत्तता दिलाने के लिए बातचीत कर रहे हैं । परंतु चीनी अधिकारियों ने उन पर बार-बार आरोप लगाया है कि वह तिब्बत को आजाद कराने की कोशिश कर रहे हैं ।
रविवार को भारत के धर्मशाला शहर में, जहां वह निर्वासन में रह रहे हैं, दलाईलामा ने चीन के भीतर प्रदर्शनकारियों को सीधे कोई संदेश नहीं दिया । पर उन्होंने कहा कि वह अब भी शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध हैं ।
उन्होंने कहा कि जहां तक अहिंसक सिद्धांत का सवाल है, मैं पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं । अगर तिब्बती हिंसा का प्रयोग करते हैं तो मैं सहमत नहीं हो सकता ।
पिछले कुछ वर्षों से युवा तिब्बती, जो तिब्बत में चीनी शासन से लगातार ज्यादा कुंठित होते जा रहे हैं, दलाई लामा के अहिंसक तरीकों पर सवाल उठाने लगे हैं । बीजिंग की सड़कों पर किसी ऐसे व्यक्ति को खोजना आसान नहीं है, जो ल्हासा की ताजी घटनाओं के बारे में बोलना चाहता हो । एक आम महिला ने कहा कि उसे स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं है । उसने कहा कि उसे भरोसा है कि चीन सरकार इस समस्या से निपटने में सक्षम है ।
एक व्यक्ति को सरकारी टेलीविजन पर इसकी रिपोर्ट देखने से इसकी जानकारी मिली थी, लेकिन उसने कोई टिप्पणी नहीं की और तुरंत वहां से चला गया । एक अन्य महिला, जो स्थानीय तिब्बती है, ने कहा कि वह दलाई लामा के खिलाफ सरकार के आरोपों पर विश्वास नहीं करती । उसने कहा कि वह हमेशा हर उस बात पर विश्वास नहीं करती, जो सरकार कहती है । उसने कहा कि वह ल्हासा में दंगाइयों की भावना को समझती है, लेकिन वह उनका अनुसरण नहीं कर सकती ।
चीनी अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को सोमवार आधी रात तक समर्पण करने या कठोर दंड भुगतने की चेतावनी दी है ।
कनाडा के अलबर्टा विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर वेनरान जियांग का कहना है कि चीनी नेतृत्व अपने अगले कदमों के बारे में फैसला लेने के संकट का सामना कर रहा है । उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि इस वक्त स्थिति का गहराई से अध्ययन किया जा रहा होगा और शायद अंदरूनी बहस भी चल रही होगी । इस समय चीनी अधिकारियों के हित में यह होगा कि वे ओलंपिक खेलों से पहले अपनी छवि को कम-से-कम नुकसान पहुंचने दें ।
चीन अगस्त में ओलंपिक खेलों का आयोजन कर रहा है ।