(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि अगर उनकी गृहभूमि में हिंसा की स्थिति बदतर हुई तो वह इस्तीफा दे देंगे । मंगलवार को उत्तरी भारत के धर्मशाला शहर से बोलते हुए नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने पत्रकारों से कहा कि घटनाएं उनके नियंत्रण से बाहर हैं । भारत स्थित तिब्बत की निर्वासित सरकार ने कहा है कि पिछले हफ्ते हुए प्रदर्शनों में कम-से-कम 99 लोग मारे गए, जिनमें मंगलवार को चीन के उत्तर-पश्चिमी गानसू प्रांत में हुए नए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए 19 लोग भी शामिल हैं ।
बीजिंग में चीन के प्रधानमंत्री ने दलाई लामा को अलगाववादी कहा है और उन पर पिछले हफ्ते तिब्बत में हिंसा आयोजित करने का आरोप लगाया है, जिसमें कम-से-कम 13 लोगों की मौत हो गई थी । इसके साथ ही चीनी नेता ने ताइवान के साथ ज्यादा मेल-मिलाप की भाषा का इस्तेमाल किया है, हालांकि चीन इस द्वीप पर भी अलगाववादी इरादे रखने का आरोप लगाता है ।
अब चीन सरकार के उच्च स्तरों पर भी पिछले हफ्ते ल्हासा में हुए हिंसक प्रदर्शनों के लिए दलाई लामा की आलोचना की जा रही है ।
मंगलवार को बीजिंग में एक वार्षिक न्यूज़ कॉन्फ्रेंस में पुनः निर्वाचित चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसे दोषी मानते हैं ।
उन्होंने कहा कि हमारे पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि यह घटना सुनियोजित, पूर्व नियोजित थी, जिसकी साजिश दलाई लामा ने की थी ।
तिब्बत पश्चिमी चीन का पर्वतीय क्षेत्र है । शुक्रवार को तिब्बत की राजधानी ल्हासा में हुए आंदोलनों के तुरंत बाद चीनी अधिकारियों ने दलाई लामा को दोषी ठहराया, जिनका कहना है कि चीन द्वारा तिब्बतियों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने में नाकाम रहने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है ।
धर्मशाला, भारत से दलाई लामा ने कहा कि चीन तिब्बत में सांस्कृतिक जनसंहार कर रहा है । उन्होंने कहा कि चीन सरकार स्वीकार करे या न करे, लेकिन वहां समस्या है ।
दलाई लामा ने कहा कि तिब्बतियों और तिब्बती बौद्ध धर्म के खिलाफ व्यापक भेदभाव हो रहा है, जिसकी वजह से वहां चीनी शासन के प्रति गहरी वितृष्णा है ।
दलाई लामा ने कहा कि वह चीन के भीतर ही तिब्बत के लिए स्वायत्तता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं । परंतु प्रधानमंत्री वेन ने कहा है कि बीजिंग का मानना है कि तिब्बती धर्मगुरू झूठ बोल रहे हैं और वास्तव में वह तिब्बत की आजादी की कोशिश कर रहे हैं ।
चीनी नेता ने ताइवान के बारे में बोलते हुए ज्यादा मेल-मिलाप वाली भाषा का इस्तेमाल किया, हालांकि इस स्वशासित द्वीप को बीजिंग चीनी क्षेत्र का हिस्सा मानता है । चीन ने ताइवान पर स्वतंत्रता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है और वह लगातार मांग करता है कि यह द्वीप पहले उसकी "एक चीन नीति" को मान्यता दे ।
उन्होंने कहा कि मैं यह भी जोर देकर कहना चाहता हूं कि हमें जल्दी ही ताइवान के साथ "एक चीन नीति" की पूर्व शर्त के तहत शांतिपूर्ण बातचीत फिर शुरू करने की आशा है ।
उन्होंने कहा कि इस बातचीत में बीजिंग और ताइपेई के बीच शत्रुता की मौजूदा स्थिति को खत्म करने का महत्वपूर्ण मुद्दा शामिल हो सकता है ।
ताइवानी प्रोफेसर चोंग-पिन लिन का कहना है कि द्वीप के लोग यह देख रहे हैं कि चीन सरकार तिब्बत में असंतोष से कैसे निपटती है ।
उन्होंने कहा कि तिब्बत में हिंसा के प्रयोग से बीजिंग द्वारा ताइवान से किये गए इस वायदे को चुनौती मिलेगी कि एकीकरण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण होगी ।
दुनिया भर के देशों के लोग भी बीजिंग की कार्रवाई पर नजर रख रहे हैं । पेरिस, न्यूयॉर्क और सिडनी में चीनी राजनयिक केंद्रों के बाहर तिब्बत-समर्थक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं ।