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अमेरिकी संसद की स्पीकर ने तिब्बत में दमन के लिए चीन की आलोचना की

21/03/2008

(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)

Tibetan spiritual leader the Dalai Lama, left, looks on as US House Speaker Nancy Pelosi talks to the media in Dharamsala, India, 21 Mar 2008
Tibetan spiritual leader the Dalai Lama, left, looks on as US House Speaker Nancy Pelosi talks to the media in Dharamsala, India, 21 Mar 2008
अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पैलोसी ने कहा है कि तिब्बत विश्व की अंतरात्मा के लिए चुनौती पेश कर रहा है और उन्होंने उस इलाके में, जिस पर चीन का नियंत्रण है, हाल में हुए दंगों के कारणों की अंतर्राष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है । चीन ने इसके जवाब में कहा है कि तिब्बत उसका अंदरूनी मामला है । वी.ओ.ए संवाददाता, धनंजय की धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश से रिपोर्ट-

 

अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पैलोसी आज तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा से उत्तर भारतीय शहर धर्मशाला में मिलीं, जहां उनकी निर्वासित सरकार स्थित है ।

 

सुश्री पैलोसी भारत की यात्रा पर हैं । तिब्बत में पिछले हफ्ते हुए हिंसक और सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को चीनी अधिकारियों द्वारा कुचले जाने के बाद वह दलाई लामा से मिलने वाली पहली वरिष्ठ विदेशी अधिकारी हैं । 

 

धर्मशाला में हजारों तिब्बतियों ने सुश्री पैलोसी का स्वागत किया । उन्होंने कहा कि विश्व को तिब्बत के मुद्दे पर अपनी आवाज उठानी चाहिए । उन्होंने कहा कि अपनी ओर से मैं कहूंगी कि अगर विश्व के स्वतंत्रता प्रेमी लोग चीन के दमन के खिलाफ और चीन तथा तिब्बत के बारे में आवाज नहीं उठाएंगे तो हम विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बोलने का नैतिक अधिकार खो देंगे ।

 

उन्होंने कहा कि तिब्बत के हालात का जायजा लेने के लिए वहां अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को भेजे जाने की जरूरत है । उन्होंने चीन से इन पर्यवेक्षकों को तिब्बत जाने की अनुमति देने की मांग की । उन्होंने कहा कि चीन के इस आरोप की एक स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए कि दलाई लामा ने ही तिब्बत में हिंसा भड़काई है । हालांकि उन्होंने कहा कि वे नहीं मानती कि शांति और अहिंसा के पैरोकार रहे दलाई लामा ऐसा कुछ कर सकते हैं ।

 

अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पैलोसी ने आज तिब्बत की निर्वासित सरकार के भारत में धर्मशाला स्थित मेकल्योड गंज मुख्यालय में तिब्बतियों के धार्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाकात की । निर्वासित तिब्बतियों के हुजूम ने यहां उनका बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से भरपूर स्वागत किया । नैंसी पैलोसी के आने से अपने लोगों पर हो रहे चीनी दमन से दुखी तिब्बतियों में साहस का संचार साफ देखा जा सकता था ।

 

स्वागत समारोह के मौके पर नैंसी पैलोसी ने लंबे संघर्ष के उनके साहस की दिल खोलकर प्रशंसा की । इस मौके पर तिब्बत के निर्वासित संसद के स्पीकर करमा चोफेल ने पैलोसी का स्वागत तो किया, लेकिन कहा कि वे और तमाम तिब्बती अभी संकट के भारी दौर से गुजर रहे हैं और वे बेहद दुखी हैं ।

 

स्वागत समारोह के बाद नैंसी पैलोसी ने दलाई लामा के साथ लंच किया । इस दौरान पैलोसी एवं अमेरिकी शिष्टमंडल में शामिल अन्य सदस्यों ने उनके साथ मौजूदा संकट पर देर तक विचार-विमर्श किया ।

 

इसके बाद नैंसी पैलोसी ने संवाददाताओं को भी संबोधित किया । उन्होंने कहा कि यहां तिब्बतियों ने उनका जो स्वागत किया, उससे आजादी की लड़ाई में साथ देने की उनकी इच्छा और बलवती हो गई है ।

 

नैंसी पैलोसी ने तिब्बतियों के संघर्ष में साथ देने के लिए भारत की भी खुल कर प्रशंसा की । इस मौके पर दलाई लामा ने सुश्री पैलोसी के आने पर खुशी जाहिर की । उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुत पहले उन्हें यहां आने की दावत दी थी । वे चाहते थे कि सुश्री पैलोसी यहां आकर तिब्बतियों के साथ एकजुटता जाहिर करें । मेरा वह सपना आज पूरा हुआ । उन्होंने सुश्री पैलोसी को लोकतंत्र, आजादी और शांति का बहुत बड़ा पैरोकार करार दिया । दलाई लामा ने उन्हें एक स्पीकर के रूप में सफल होने का आशीर्वाद भी दिया ।

 

धर्मशाला का माहौल दिल को छूने वाला था । धर्मशाला में जन्मे एवं पले-बढ़े तिब्बती बच्चे अपना वतन देखना चाहते हैं । वहां का पानी पीना चाहते हैं । वहां की हवा में सांस लेना चाहते हैं । अपने वतन की बात करते हुए कई स्कूली छात्र-छात्राएं फूट-फूटकर रो पड़े ।

 

यहां 10 मार्च से भूख हड़ताल लगातार जारी है, जिसमें बीसियों तिब्बती लोग शामिल हैं । तिब्बती युवक जुलूस निकाल रहे हैं और हर जगह तिब्बत का झंडा लिये हुए दिखाई देते हैं । बच्चे अपने स्कूली बस में भी झंडा हाथ में लेकर चलते हैं । यहां के तिब्बती बच्चों के स्कूलों की शिक्षिकाओं ने बताया कि तिब्बत की नवीनतम घटनाओं की वजह से इन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है । उनकी भूख मर गई है । हमलोग उन्हें समझाते हैं कि संघर्ष बहुत लंबा है, इसलिए ऐसा करने से काम नहीं चलेगा और हम अंततः कामयाब होंगे ।

 

यहां करीब 20 ऐसे तिब्बती आए थे, जो कभी चीन में राजनीतिक कैदी रह चुके हैं । कुछ वर्ष पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठनों के हस्तक्षेप से उन्हें रिहाई मिली थी । उन्होंने बताया कि चीनी जेलों में उन्हें कैसे यातनाएं दी जाती थीं और पीटा जाता था ।

 

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में आए रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद ने बताया कि अमेरिका में तिब्बत के बारे में दोनों पार्टियों में कोई मतभेद नहीं है । उन्होंने कहा कि तिब्बत की आजादी और शांति के मुद्दे पर पूरा अमेरिका एक है । उन्होंने कहा कि तिब्बत ही नहीं, किसी भी देश की संस्कृति को खत्म करने की कोशिश कभी कामयाब नहीं होती ।

 

 

 

 

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