(संवाददाता, वी.ओ.ए न्यूज़)
चीन ने अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पैलोसी के दलाई लामा से मिलने पर नाराजगी जताते हुए आज चेतावनी दी कि उसके घरेलू मामलों में दखल न दिया जाए । उसने भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कहा है कि वह दलाई लामा की चिकनी-चुपड़ी बातों से गुमराह न हों ।
आज नई दिल्ली में चीनी दूतावास ने मीडिया के लिए एक वृत्त चित्र दिखाने की व्यवस्था की । इसका उद्देश्य यह साबित करना था कि दलाई लामा ने ही ल्हासा में हिंसा की साजिश की थी ।
दलाई लामा इस आरोप का पहले ही खंडन कर चुके हैं, लेकिन भारत में चीनी राजदूत झांग यान ने जोर देकर कहा कि तिब्बती नेता के कार्यों से पता चलता है कि ल्हासा में असंतोष के पीछे उनका हाथ था और भारत तथा अन्य देशों को उनके इरादों को परखना चाहिए । उन्होंने पत्रकारों को बताया कि चीन भारत द्वारा अभी तक अख्तियार की गई भूमिका की सराहना करता है और आशा करता है कि नई दिल्ली तिब्बत की घटनाओं के बारे में सही रुख अपनाती रहेगी ।
श्री झांग यान ने पत्रकारों से कहा कि तिब्बत चीन का अंदरूनी मामला है और किसी देश, संगठन या व्यक्ति को गैर-जिम्मेदार बातें नहीं करनी चाहिए । उन्होंने कहा कि हम किसी भी देश को चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं देते और चीन में गड़बड़ फैलाने के प्रयास असफल हो जाएंगे ।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने चीन से तिब्बत में हाल में हुई हिंसा के मामले में संयम बरतने के लिए कहा है । मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तिब्बत में चीनी शासन के प्रति गहरी वितृष्णा है । चीन का कहना है कि दलाई लामा ने बीजिंग में होने वाले ओलंपिक खेलों को नुकसान पहुंचाने के लिए हिंसा भड़काई है ।
चीन का 1951 से तिब्बत पर नियंत्रण है । 1959 में चीनी शासन के खिलाफ आंदोलन असफल हो जाने पर दलाई लामा वहां से भाग कर भारत आ गए थे, जहां वह निर्वासन में रह रहे हैं । उन्होंने कहा है कि चीनियों द्वारा तिब्बत की विलक्षण संस्कृति का विनाश किये जाने का खतरा है और वह इस क्षेत्र के लिए ज्यादा स्वायत्ता चाहते हैं ।