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| Nepali women stand in a queue to cast their votes, as a policewoman stands guard outside a polling booth in Katmandu, Nepal. |
नेपाल में लाखों मतदाताओं ने हिंसा के खतरों और दुर्गम क्षेत्र की परवाह न कहते हुए 601 सदस्यों की राष्ट्रीय असेंबली के ऐतिहासिक चुनाव में मतदान किया, जो संविधान बनाएगी । दो बार विलंब के बाद हुए चुनावों पर हजारों घरेलू और 850 अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने नजर रखी जिनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमीकार्टर भीथे
नेपाल में 50 से ज्यादा पार्टियों के करीब 4,000 उम्मीदवारों के नाम मतपत्र पर थे । ये चुनाव लोकतांत्रिक सरकार के अंतर्गत इस हिमालयी सामंती राज्य के एक बहु-जातीय आधुनिक गणराज्य में परिवर्तित होने की लंबी और कभी-कभी हिंसक प्रक्रिया का नवीनतम कदम है ।
राजधानी में मतदाता केशव राज वज्राचार्य ने कहा कि वह काठमांडू में अपने मतदान केंद्र पर हिंसा को लेकर चिंतित नहीं था, लेकिन उसने अन्य क्षेत्रों में हमले होने की खबरें सुनी थीं ।
उसने कहा कि उसे इतने वर्षों के विलंब के बाद मतदान करके खुशी हुई है, क्योंकि ये चुनाव उन जातीय गुटों को ऊपर उठाएंगे, जो दबाए गए हैं ।
संवैधानिक सभा के चुनाव सरकार और माओवादियों के बीच 2006 में हुए शांति समझौते का परिणाम हैं । माओवादी नेपाल को राजशाही से छुटकारा दिलाने के लिए एक दशक से युद्ध कर रहे थे । पूर्व तानाशाही राजा मौजूद है, लेकिन उसके अधिकार छीन लिये गए हैं और अब एक बहु-दलीय गठबंधन, जिसमें पूर्व विद्रोही शामिल हैं, सरकार चला रहा है और नेपाल को लोकतांत्रिक गणराज्य के रास्ते पर ले जा रहा है ।
मतदाता पुष्पा बन्या ने शाही महल के गेट की सड़क के पार वोट डाला है । इस गृहणि का कहना है कि नेपाल को अब भी राजा की जरूरत है, लेकिन आशा है कि चुनावों के बाद आने वाली नागरिक सरकार देश के लिए अच्छी होगी ।
बहुत से मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिससे पता चलता है कि चुनाव में लोग गहरी रुचि ले रहे हैं ।
सबसे प्रतिष्ठित चुनाव पर्यवेक्षक, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने वी.ओ.ए न्यूज़ को बताया कि फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या चुनाव हारने वाले जनता के फैसले को शांतिपूर्वक स्वीकार करेंगे ।
श्री कार्टर ने कहा कि यहां लोगों के बीच अपेक्षाएं बहुत ज्यादा हैं और उनका निराश होना लगभग अपरिहार्य है । पर उससे पहले उन्होंने प्रतिबद्धता जताई है कि निराशाजनक होने पर भी वे परिणामों को शांतिपूर्वक स्वीकार करेंगे ।
चुनाव पूर्व हुई हिंसा के अतिरिक्त, जिसमें कुछ प्रत्याशी और उनके समर्थक मारे गए थे, इस दुर्गम भूभाग में लोकतंत्र की प्रक्रिया अन्य कुछ तरह से भी भारी पड़ रही है । कुछ चुनाव अधिकारी ऊंचाई पर होने वाली बीमारी के कारण बीमार पड़ गए या भारी बर्फबारी की वजह से देर से पहुंच सके । कुछ याक पालकों ने जब रेडियो पर यह सुना कि उन्हें वोट डालने चाहिए तो वे अपने पशुओं को अपने बच्चों की देखरेख में छोड़ गए और कई दिनों तक पैदल चलकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे ।
हालांकि कुछ जिलों से प्रारंभिक नतीजे एक या दो दिन में आने की संभावना है, लेकिन 240 निर्वाचन क्षेत्रों की सही तस्वीर आने में हफ्तों लग सकते हैं ।