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सीनेटर ओबामा के सहयोगी सम्मानित विदेश नीति विशेषज्ञ

23/08/2008

 

Joseph Biden
Joseph Biden
डेलावेयर के सीनेटर जो बायडन, जिन्हें हाल ही में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बराक ओबामा का सहयोगी घोषित किया गया है, एक सम्मानित विदेश नीति विशेषज्ञ हैं । वी.ओ.ए संवाददाता डेबोराह टेट ने सीनेटर बायडन के बारे में जानकारी दी है, जिन्होंने खुद इस साल डेमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने का असफल प्रयास किया था ।

सीनेटर बायडन सीनेट विदेश नीति समिति के अध्यक्ष और डेमोक्रेटिक पार्टी में विदेश नीति के मामलों में सबसे प्रभावशाली सदस्यों में से एक हैं । उनकी विशेषज्ञता से रिपब्लिकन पार्टी के इन तर्कों का सामना करने में मदद मिल सकती है कि ओबामा प्रशासन विदेश नीति के मामले में अनुभवहीन सिद्ध होगा ।

सीनेटर बायडन बुश प्रशासन की विदेश नीति के, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ युद्ध करने का तरीका भी शामिल है, मुखर आलोचक रहे हैं । हालांकि 2002 में उन्होंने इराक अमेरिका-नीत हमले के पक्ष में वोट दिया था, जिसका श्री ओबामा शुरू से ही विरोध करते रहे, श्री बायडन बाद में इस युद्ध के आलोचक हो गए ।

उन्होंने कहा कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में प्रशासन का मूल रवैया वास्तविकता से दूर है । खतरे से पूर्व कार्रवाई करने, सरकार में परिवर्तन करने और आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के नारे लगाने से हम कम सुरक्षित हुए हैं, एक देश के तौर पर ज्यादा सुरक्षित होने के बजाय कम सुरक्षित हो गए हैं ।

इस साल के शुरू में श्री बायडन ने पत्रकारों से कहा था कि राष्ट्रपति बुश के विदेश नीति पर लिये गए फैसले व्हाइट हाउस के अगले पदाधीकारी के लिए स्थिति ज्यादा जटिल बना देंगे ।

उन्होंने कहा कि अगला राष्ट्रपति डेमोक्रेटिक हो या रिपब्लिकन, मुझे आशा है कि डेमोक्रेटिक होगा, उसे लगभग अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और गलती के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहेगी ।

श्री बायडन का इराक युद्ध से जल्दी ही एक निजी संबंध बन जाएगा । उनका सबसे बड़ा पुत्र बीयू, जो डेलावेयर नेशनल गार्ड में कैप्टन है, अक्टूबर में इराक में लड़ाई में जा रहा है ।

श्री बायडन स्वयं भी बहुत यात्राएं कर चुके हैं और कई बार इराक जा चुके हैं । हाल ही में वह पूर्व सोवियत गणराज्य जॉर्जिया की यात्रा से लौटे हैं, जो उस संकटग्रस्त देश के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर की गई थी और विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी यात्रा से उन्हें श्री ओबामा का संभावित सहयोगी बनने में मदद मिली ।

सीनेटर बायडन को मुखर राजनेता माना जाता है ।

जनवरी में आयोवा कॉकस के चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद वह राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो गए थे और कहा था कि उनके विचार में सीनेटर ओबामा व्हाइट हाउस के लिए तैयार नहीं थे । उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति का पद ऐसा नहीं है, जिस पर रहते हुए सब कुछ सीखा जाए ।

श्री बायडन ने तब भी विवाद खड़ा कर दिया था, जब उन्होंने एक अखबार को दिये इंटरव्यू में श्री ओबामा को मुख्यधारा का पहला ऐसा अफ्रीकी-अमेरिकी बताया था, जो अच्छा वक्ता, प्रतिभाशाली, स्वच्छ और अच्छा दिखने वाला व्यक्ति है । बाद में उन्होंने इन टिप्पणियों के लिए क्षमा मांगी थी और कहा था कि वह वास्तव में श्री ओबामा की सराहना कर रहे थे ।

श्री ओबामा ने कहा था कि उन्होंने इन टिप्पणियों को व्यक्तिगत नहीं माना, लेकिन उन्हें ऐतिहासिक रूप से गलत बताते हुए पिछले अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों, जेसी जैक्सन और एल शार्पटन का उल्लेख किया था ।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि श्री बायडन की मुखरता ओबामा अभियान के लिए लाभदायक हो सकती है और उनका अनुमान है कि यह कुछ मुद्दों पर रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी जॉन मैककेन के विचारों को चुनौती देने से नहीं हिचकेंगे । कुछ डेमोक्रेटिक कार्यकर्ता मानते हैं कि श्री ओबामा अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी के प्रति पर्याप्त सख्त नहीं रहे हैं ।

श्री बायडन ने 1988 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने का प्रयास किया था, लेकिन जल्दी ही इस दौड़ से बाहर हो गए थे, जब उन पर आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने ब्रिटिश लेबर नेता नील किनॉक के भाषण को चुराया था ।

65-वर्षीय डेलावेयर डेमोक्रेट पहली बार 1972 में सीनेट के लिए चुने गए थे ।

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