Maulvi Jalaluddin Haqqani speaks with a group of newsmen in Pakistan's capital city of Islamabad (File)
तालिबान सदस्यों के घातक हमलों का खतरा होने के बावजूद अफगानिस्तान में कई युवा महिलाओं का शिक्षा हासिल करने का इरादा पक्का है । इस महीने कंधार शहर में स्कूल जाते हुए कई लड़कियों पर हमले हुए । हमलावरों ने उन लड़कियों के चेहरे पर तेजाब फेंके , जिनमें से तीन गंभीर रूप से घायल हो गई हैं ।
तेजाब से जलाई गई एक छात्रा ने कहा - इसके बावजूद कि इस हिंसा के निशाने पर वे हैं , अफगान लड़कियां रुक नहीं सकतीं । मैं अपनी पढ़ाई जारी रखूंगी । इस तरह की उग्रवादी गतिविधियां मुझे शिक्षा लेने से नहीं रोक सकतीं । एक अन्य छात्रा ने इसी तरह का इरादा जाहिर किया । वह कहती है - मैं डरी हुई नहीं हूं । मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं । अगर हम स्कूल नहीं जाएंगे तो हमें घर पर बैठे - ठाले रहना पड़ेगा ।
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की पत्नी , अमेरिका की प्रथम महिला लॉरा बुश ने लड़कियों के खिलाफ हमले की निंदा की । उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में , जो भी प्रगति हुई है , तालिबान द्वारा जारी आतंकी हमलों का खतरा मंडरा रहा है । अफगानिस्तान में 1996 से 2001 तक तालिबान के कट्टरवादी इस्लामी शासन के दौरान महिलाओं के लिए स्कूल जाना मना था । उन्हें घर से बाहर तक जाने की मनाही थी । महिला डॉक्टरों को प्रैक्टिस करने से रोक दिया गया था और किसी भी महिला को किसी राजनीतिक कार्यालय में काम करने की इजाजत नहीं थी ।
लेकिन आज तालिबान के दमन से मुक्त होकर अफगान महिलाएं स्कूल जा रही हैं , चुनाव लड़ रही हैं और पुलिस अधिकारी बन रही हैं । अफगानिस्तान में 60 से अधिक महिला जज है और 400 महिला पत्रकार । अफगानिस्तान की संसद की सीटों के 28 प्रतिशत पर महिलाओं का कब्जा है । अब 20 लाख लड़कियों सहित 60 लाख से अधिक बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं ।
अमेरिका और उसके सहयोगी देश अफगानिस्तान सरकार के साथ मिलकर और अधिक स्कूल बना रहे हैं , जहां बच्चे पढ़ सकें । वे व्यापार को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सड़कें बना रहे हैं । इसके अलावा अफगानिस्तान की जनता को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की बुनियादी सुविधाएं भी दी जा रही हैं ।
सुश्री बुश ने कहा - तालिबानों द्वारा स्कूल जाने वाली लड़कियों के खिलाफ की गई इस तरह की शर्मनाक और कायराना हरकतों की पूरे अमेरिका व दुनिया के अमनपसंद लोग निंदा कर रहे हैं ।