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| AR Rahman |
पिछले वर्ष जब ऐ आर रहमान अपनी कंसर्ट के लिए वॉशिंगटन डी. सी आए थे तो उन्होंने खास समय निकालकर वौइस् ऑफ़ अमेरिका से बातचीत की थी. आज रहमान को ऑस्कर पुरस्कार के लिए तीन नामांकन प्राप्त हुए है और इसीलिए हम रहमान के साथ की गई भेंट वार्ता दोबारा आप तक पहुँचा रहे है.
ऐ आर रहमान ने हमें बताया था की जब वह ५ या ६ साल के थे तब से उन्होंने हारमोनियम सीखना शुरू किया. उसके बाद रहमान ने वेस्टर्न म्यूजिक और कर्नाटक शैली के संगीत की भी शिक्षा ली. १८-१९ वर्ष की छोटी आयु में रहमान ने संगीत देने की शुरुआत की. रहमान मानते है की संगीतकार के लिए या किसी भी कलाकार के लिए लोगों का प्यार सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार होता है. जहाँ तक फिल्मो को संगीत देने की बात है रहमान समझते है कि उनके लिए हर फ़िल्म, अलग होती है. हर फ़िल्म के संगीत पर काम करते हुए नए फोर्मुले का इस्तेमाल करना पड़ता है. रहमान को अक्सर भारतीय संगीत में वेस्टर्न वाद्यों और डिजीटल तकनीक का उपयोग करने वाले पहले संगीतकार के रूप में देखा जाता है. इस विषय पर बात करते हुए रहमान बताते है कि डिजीटल तकनीक का उपयोग करना ग़लत बात नही है और शायद इसी के कारण नई पीढी बॉलीवुड फ़िल्म संगीत की ओर आकर्षित हो गई है. लेकिन रहमान समझते है कि आवाज ही सबसे बड़ा वाद्य है क्योंकि इसके सहारे कई चीजे की जा सकती है, आवाज से बढ़कर कोई वाद्य नही है.
ऐ आर रहमान ने एक सामाजिक संस्था भी शुरू की है जो गरीब लोगों के लिए काम करती है. रहमान शिक्षा की एहमियत को खूब समझते हैं और उनकी संस्था भी गरीब लोगों को शिक्षा देने के लिए काम करती है. अपनी रिकॉर्ड की बिक्री से आया हुआ पैसा रहमान अपनी संस्था को दान करते है.
रहमान बताते है कि उनके संगीत पर सूफी परंपरा, सूफी, संस्कृति, और सूफी संगीत का जबरदस्त प्रभाव है. रहमान अपने चाहने वालों को बताना चाहते है कि संगीत में लोगों को एकता के सूत्र में बांधने की शक्ति है, संगीत की कोई भाषा या मज़हब नही होता. अलग अलग विचारधारा के लोगों को एकत्र करने का काम संगीत कर सकता है, ये ऐसी चीज है जो राजनीती भी नही कर पाई है.