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श्री लंका में संघर्ष का सबसे अधिक प्रभाव नागरिकों पर
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31/01/2009
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 | | Sri Lankans displaced by the fighting between government troops and Tamil Tiger rebels in the island's east, head back to their shelters in Batticaloa (File) | द्वीप देश श्री लंका में सन 1883 से लड़ाई चल रही है । एक ओर है श्री लंका सरकार, जो द्वीप देश के बहु संख्यक बौद्ध सिंहलियों का प्रतिनिधित्व करती है, और दूसरी ओर हैं तमिल टाइगर्स मुक्ति मोर्चा यानी एलटीटीई, जिसे अमरीका सरकार ने विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची में रखा है जो देश के हिन्दू तमिलों की प्रमुखता वाले उत्तरी भाग में एक स्वतंत्र राष्ट्र की मांग में हिंसात्मक विद्रोह कर रहे हैं । इतने वर्षों से श्री लंका में चल रहे संघर्ष में सत्तर हज़ार से अधिक लोगों की जानें गई हैं, जिनमें अधिकतर नागरिक हैं, और देश के भीतर और भारत में अन्य लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं ।
रेड क्रौस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के अनुसार, जो एक मात्र ऐसा अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसे संघर्ष क्षेत्र में जाने की अनुमति है, लगभग दो लाख पचास हज़ार नागरिक, ढाई सौ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में, सेना और तमिल टायगरों के बीच चल रही भारी लड़ाई में फंसे पड़े हैं । अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रौस का कहना है कि उनके पास कोई सुरक्षित क्षेत्र नहीं है और वह भाग कर कहीं जा भी नहीं सकते । इन शर्णार्थियों के पास खाद्यान्न की भारी कमी है और उन्हें आपत्कालीन स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं । न्यू यार्क स्थित अंतर्राष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संगठन, जो मानवाधिकारों को बढ़ावा देता है और उल्लंघनों की जांच करता है, उस संगठन का कहना है कि लाखों नागरिक सीमित साधनों के साथ युद्ध रत क्षेत्र में फंसे पड़े हैं क्योंकि सरकार ने राष्ट्रसंघ और अन्य सहायता कर्मियों को वहां से चले जाने के आदेश दिए हैं । जो लोग लड़ाई से बच कर भागने में सफल हो जाते हैं उन्हें थल सेना द्वारा संचालित बंदी शिविरों में अनिश्चित काल के लिए रहना पड़ता है ।
27 जनवरी को खाद्य सहायता अनुदान आयोजन में बोलते हुए, श्री लंका में अमरीकी राजदूत रौबर्ट ब्लेक ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अनुसार तमिल टाइगर नेताओं को अपना दायित्व निभाते हुए लड़ाई में फंसे पड़े लोगों को प्रस्थान की स्वतंत्रता देनी चाहिए जिससे वह लड़ाई से बच कर कहीं और जा सकें । और दोनों पक्षों को अधिक से अधिक संयम बरतना चाहिए जिससे दोनों ओर से हो रही गोली बारी में नागरिक न फंस जाएं । हाल के दिनों में दोनों पक्षों की ओर से चलाए जा रहे तोप के गोलों से बहुत से नागरिक मारे गए हैं ।
तमिल टाइगरों को तत्काल ही उन क्षेत्रों से भारी अस्त्र चलाना बन्द करना चाहिए जिस क्षेत्र में या जिसके आस पास घनी आबादी है । सरकार को भी जवाब में ऐसे क्षेत्रों में गोलाबारी से बचना चाहिए जिनमें नागरिकों की संख्या काफ़ी अधिक है ।
अमरीकी राजदूत रौबर्ट ब्लेक ने कहा संघर्ष से प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है । “हम केवल मिल कर काम करके ही प्रगति कर सकते हैं ।”
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