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वैश्विक आर्थिक संकट से भारत भी प्रभावित
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16/02/2009
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 | | Acting Indian finance Minister Pranab Mukherjee | भारत ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक संकट के कारण भारत का आर्थिक विकास लड़खड़ा रहा है और आर्थिक वृद्धि बहाल करने और लोगों की नौकरियां बरकरार रखने के लिए कड़े उपायों ही ज़रूरत है. नई दिल्ली से संवाददाता अंजना पसरीचा अपनी रिपोर्ट में कहती हैं कि सरकार ने चेतावनी दी है कि हाल के वर्षों में वित्तीय संकट अपने उच्चतम स्तर तक पहुँच जायेगा.
कार्यवाहक वित्त मंत्री प्रणव मुख़र्जी ने कहा कि जब बहुत से देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है तब भारतीय अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत तक बढ़ सकती है. तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाले देशों की सूची में भारत दूसरे नम्बर पर है. लेकिन श्री मुख़र्जी ने स्वीकार किया कि वैश्विक आर्थिक संकट से भारत अछूता नहीं है और आर्थिक वृद्धि के लिए हमें कड़े कदम उठाने होंगे.
भारत की वर्तमान सरकार का कार्यकाल इस वर्ष मई में समाप्त हो जायेगा. घरेलू आर्थिक वृद्धि को उत्तेजित करने के लिए कड़े उपाय करने होंगे. उत्पादन, निर्माण, ऑटो मोबाइल और निर्यात के क्षेत्रों में गिरावट महसूस की जा रही है इसलिए हजारों लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं.
वित्त मंत्री ने कहा की शिक्षा और समाज कल्याण परियोजनाओं में अधिक खर्च किया जायेगा और आगामी चुनावों को देखते हुए ग्रामीण निकायों में सब्सिडी बढ़ाई जायेगी.
प्रतिरक्षा के क्षेत्र में वर्ष २009 में २४ प्रतिशत अतिरिक्त खर्च किया जायेगा. मुंबई आतकवादी हमलों के कारण प्रतिरक्षा उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च किए जाने की आवश्यकता आन पड़ी है.
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