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अमरीका, भारत और पाकिस्तान के सामने एक जैसे ख़तरे मौजूदः अमरीकी दूत
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16/02/2009
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 | | Pranab Mukherjee (R) arrives in Parliament in New Delhi | वरिष्ट अमरीकी दूत रिचर्ड होलब्रुक ने कहा है कि इस्लामी उग्रवाद, भारत, पाकिस्तान और अमरीका की सुरक्षा के लिए ख़तरा है. नई दिल्ली से अंजना पसरीचा की रिपोर्ट है कि अपनी इस क्षेत्र की यात्रा के अंतिम चरण में श्री होलब्रुक ने भारत के वरिष्ट नेताओं से भेंट की. भारत के पहले उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की यात्रा की थी.
नई दिल्ली में उच्च सुरक्षा अधिकारियों के साथ वार्ताओं के दौरान अमरीकी दूत रिचर्ड होलब्रुक की विचार सूची में क्षेत्र में स्थित इस्लामी उग्रवादी दलों की ओर से बना वैश्विक ख़तरा प्रमुख विषय था.
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ वार्ताओं के बाद श्री होलब्रुक ने पत्रकारों से कहा कि इस्लामी उग्रवाद से भारत, पाकिस्तान और अमरीका को एक जैसा ख़तरा है.
श्री होलब्रुक ने यह बात तब कही जब पाकिस्तान की सरकार ने इस्लामी रूढ़िवादियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे पाकिस्तान की स्वात घाटी में शरिया क़ानून लागू कर दिया जाएगा. श्री होलब्रुक ने कहाः
“स्वात में जो कुछ हुआ उससे एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि भारत, पाकिस्तान और अमरीका, सभी के सामने एक सा ख़तरा खड़ा हुआ है. स्वतंत्रता के साठ वर्षों में पहली बार आपका देश, पाकिस्तान और अमरीका, सभी को एक ही शत्रु का सामना है जो हमारे नेतृत्व, हमारे राजस्व, और हमारी जनता के लिए ख़तरा पैदा करता है.”
राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में श्री होलब्रुक दक्षिण एशिया में अमरीकी नीतियों के प्रभारी हैं और पहली बार क्षेत्र की यात्रा पर हैं. उन्होंने कहा कि वह कोई भी “संदेश या दिशा निर्देश” लेकर नहीं आए हैं, लेकिन वह विविध विषयों पर भारत सरकार के विचार जानना चाहते हैं.
विश्वास किया जाता है कि भारतीय अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पाकिस्तान, आतंकवाद का गढ़ है और पाकिस्तान पर अपने देश के “आतंकवाद के रचना तंत्र” को नष्ट करने के लिए दबाव डाला जाना चाहिए.
नई दिल्ली, उग्रवादियों से लड़ने के लिए अमरीका की ओर से पाकिस्तान को दिए जाने वाले धन की बात से भी अप्रसन्न है.
प्रेक्षकों का कहना है कि श्री होलब्रुक की यात्रा का एक लक्ष्य, नवंबर में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को कम करना भी था. पिछले सप्ताह इस्लामाबाद ने यह स्वीकार किया था कि उन हमलों की आंशिक योजना इस्लामाबाद में बनाई गई थी.
अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान के विकास में भी भारत की और बड़ी भूमिका चाहता है. भारत वहां कई राज मार्गों का निर्माण कर चुका है और उसने कई अन्य परियोजनाओं में भी भाग लिया है.
हाल के वर्षों में भारत और अमरीका के बीच संबंध काफ़ी सुधरे हैं. अधिकतर प्रेक्षकों को आशा है कि अमरीका के नए प्रशासन में दोनों देशों के संबंध और सुदृढ़ होंगे.
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