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आर्थिक मंदी के बावजूद भारत के मोबाइल फ़ोन बाज़ार पर छाई तेज़ी
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20/03/2009
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भारत विश्व का तेज़ी से बढ़ता मोबाइल फ़ोन बाज़ार बन गया है. नयी दिल्ली से हमारी संवाददाता अंजना पसरीचा अपनी रिपोर्ट में कहती है कि ३५ वर्षीय शंकर दास विगत 10 वर्षों से नयी दिल्ली की एक कंपनी के लिए बढ़ई, पेंटिंग और नल-साजी का काम करके एक माह में करीब 5 हजार रुपये कमाया करते थे . लेकिन आज कल वो अपने ग्राहकों को कम्पनी की निर्धारित कीमत से भी आधी कीमत पर मोबाइल फ़ोन की सुविधाएँ उपलब्ध करा रहे हैं. देखते देखते उनके ग्राहक इतने बढ़ गए कि वो अब पहले की अपेक्षा तीन गुना अधिक धन कमा रहे हैं.
इस वर्ष शंकर दास उन ढाई करोड़ लोगों में से एक बन गए हैं जिन्होंने इस वर्ष के प्रथम दो महीनों में अपने ग्राहकों के लिए
फ़ोन कनेक्शन खरीदे हैं. टेलेफ़ोन संपर्क तेज़ी के साथ जुड़ता ही जा रहा है . सब्जी बेचने वाला हो,रिक्शावाला,टैक्सी चालाक हो या फिर हो मजदूर. फ़ोन के बिना कोई रह नहीं पा रहा.
गिरीश त्रिवेदी "फ्रोस्ट एंड सुल्लीवन" कम्पनी में विश्लेषक हैं . वो कहते हैं कि मोबाइल फ़ोन उन दसियों लाख लोगों के हाथों
के लिए एक सुविधाजनक उपकरण है जो असंगठित निकायों में काम करते हैं. मोबाइल फ़ोन सामूहिक रूप से स्वीकार
किया गया है . यह लोगों की रोटी- रोज़ी में सुधार करता है.
फ़ोन पर बात करने की दरें घट गयी हैं - सिर्फ एक रुपया प्रति मिनट . पांच हज़ार रूपये माहवारी से कम कमाने वाला भी
जेब में फ़ोन रखे रहता है क्योंकि उसके बिना काम नहीं चल पाता.
करीब 37 करोड़ 50 लाख लोगों के पास फ़ोन है. श्री त्रिवेदी कहते हैं कि एक अरब से अधिक की आबादी वाले देश भारत में मोबाइल फ़ोन के अत्याधिक फलने फूलने की सम्भावना लगातार बनी हुई है. फ़ोन संस्कृति ने गाँव की ओर अग्रसर होना भी शुरू कर दिया है.
'फ़ोन ओपेरटर संघ' का मत है कि वर्ष 2010 तक 52 करोड़ 50 लाख लोगों की पोकिटों से फ़ोन झांकता मिल जायेगा.
टिप्पणियां :
1. मोबाईल बाजार में तेजी
केवल मोबाईल के बाजार में ही क्यों, भारत में इन दिनों सभी चीजें धडल्ले से बिक रही है. मंदी की केवल चर्चा हो रही है. वाहन उद्योग में दुपहिया वाहनों की बिक्री में पिछले साल की तुलना में १८ प्रतिशत वृद्धी पाई गई है. स्टील और सिमेंट में भी वृद्धी की रिपोर्ट है. मोबाईल तो खैर एक छोटी सी चीज है.
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Submitted by: देविदास देशपांडे (भारत)
03-20-2009 - 16:15:17