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Pranab Mukherjee
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प्रत्याशा है कि इस सप्ताह जी-20 आर्थिक शिखर सम्मेलन के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भेंट में भारतीय प्रधान मंत्री उनसे कहेंगे कि “अच्छे” और “बुरे” तालिबान के बीच कोई अंतर नहीं है. इस बारे में हमारे नई दिल्ली स्थित संवाददाता स्टीव हरमन की रिपोर्टः
लंदन में आयोजित जी-20 आर्थिक शिखर सम्मेलन के दौरान, भारतीय प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह बृहस्पतिवार को पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाक़ात करेंगे.
ऐसे में जबकि शिखर सम्मेलन का प्रमुख विषय विश्व व्यापी आर्थिक संकट है, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा दक्षिण एशिया की सुरक्षा के बारे में भी वार्ताएं करेंगे.
उत्तर पूर्वी भारत में गुआहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि प्रधान मंत्री सिंह अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा के उग्रवाद के बारे में वार्ताएं करने को उत्सुक हैं.
श्री मुखर्जी, अल क़ायदा और अन्य उग्रवादियों से लड़ने के लिए, अफ़ग़ानिस्तान में आने वाली सरकार में कथित “अच्छे” तालिबान की साझेदारी के प्रस्ताव से परेशान हैः
“मुझे आशंका है कि हमारी सोच यह है कि आप “अच्छे” तालिबान को “बुरे” तालिबान से अलग नहीं कर सकते. कोई भी आतंकवादी अच्छा या बुरा नहीं हो सकता.”
तालिबान, जो बुनियादी तौर पर जातीय पश्तून हैं, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय हैं. सन् 2001 में अमरीका के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान में की गई कार्यवाही में तालिबान को सत्ता से हटा दिया गया था.
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्या, तब तक नहीं सुल्झाई जा सकती, जब तक उसके पड़ोसी देश पाकिस्तान के सामने खड़ी चुनौतियों का समाधान न किया जाए. श्री मुखर्जी ने पाकिस्तानी प्रशासन वाले उन क्षेत्रों की ओर ध्यान दिलाया जो विश्व व्यापी आतंकवाद का गढ़ हैं.
इस सप्ताह, भारतीय और अमरीकी नेताओं के बीच आमने सामने होने वाली पहली बैठक को भारत और अमरीका के बीच सुधरते संबंधों को बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जौर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन काल में भारत और अमरीका के संबंधों में काफ़ी मज़बूती आई. पारंपरिक रूप से भारत की अपेक्षा पाकिस्तान के साथ अमरीका के बेहतर संबंध हैं. Key words: India, US, Good and Bad Taliban