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खटमलों की पुनर्वापसी
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11/04/2009
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 | | Bedbugs are even nastier to look at up close than they are crawling on your ankle | अंतर्राष्ट्रीय यात्रा में वृद्धि और कीटनाशकों के इस्तेमाल में कमी खटमलों की संख्या में वृद्धि का बड़ा कारण है.
दूर देशों की यात्रा का आनन्द उठाते समय आप अब कुछ निशानियां भी लेकर लौट सकते हैं...लेकिन अब यात्री कुछ अनचाही चीज़ें साथ लेकर लौट रहे है...जैसे खटमल...वॉइस अमेरिका की मेलिंडा स्मिथ दुनिया भर में इनकी संख्या में वृद्धि की परेशान करने वाली घटना के बारे में बता रही हैं.
खटमलों की समस्या को लोग कदाचित ही गंभीरता से लेते हैं. लेकिन सोते समय रक्त चूसने वाले ये कीट समस्या भी खड़ी कर सकते हैं.
अमेरिकन मेडिकल एसोसियेशन के जर्नल के अनुसार छः पैरों वाले ये कीट उड़ तो नहीं सकते हैं लेकिन आसानी से आस-पास घूम सकते हैं।
एक अध्ययन के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं में वृद्धि के कारण पिछले कुछ दशकों में अमेरिका और कुछ अन्य देशों में बिस्तर पर पाये जाने वाले कीटों की संख्या में पांच गुने तक की वृद्धि हुई है।
मिसीसिपी विश्वविद्यालय के कीटविज्ञान के विशेषज्ञ जेरोम गोडॉर्ड के अनुसार ये कीट सामान के साथ ही कहीं पंहुचते हैं...और इनके फैलने का सफाई से कोई लेना-देना नहीं है.... वह कहते हैं- कुछ मामलों में मैंने इन्हें पांच सितारा होटलों में भी पाया है.
डीडीटी जैसे कीटनाशकों की वजह से ये सूक्ष्म कीट कुछ देशों से लगभग समाप्त हो गये थे लेकिन कीटनाशकों के इस्तेमाल में कमी से इनकी वापसी हो गई है. दिन के समय ये छिपे रहते हैं...और रात में ये अपने शिकार के रक्त में खून के बहाव को सामान्य बनाये रखने वाला पदार्थ मिलाकर खून चूसते हैं...चुभन का अहसास न हो इसके लिये एक विशेष रसायन का प्रयोग करते हैं...जिससे शिकार को काटे जाने का पता नहीं चलता है.
मिसीसिपी विश्वविद्यालय के चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर रिचर्ड डी शाज़ो के अनुसार विशेषज्ञों को मनुष्यों पर इनके प्रभाव और इसके उपचार की ठीक-ठीक जानकारी नहीं है.
डॉ. शाज़ो कहते हैं ऐसे मामलों में हम मच्छरों के काटने की वजह से उत्पन्न होने वाली एलर्जी और दूसरे लक्षणों के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाइयों का प्रयोग करते हैं...जैसे टॉपिकल एंटीहिस्टॉमाइन और खायी जाने वाली एंटीहिस्टॉमाइन...मामला कुछ गंभीर होने पर हम तेज असर वाली दवाइयां इस्तेमाल करते हैं।
यह अध्ययन अमेरिकन मेडिकल एसोसियेशन के जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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