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जॉर्ज वॉशिंगटन के सामाजिक शिष्टाचार के नियम
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12/04/2009
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 | | George Washington may have used 110 rules for proper behavior and conversation to help control his temper | संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने अपनी युवावस्था में 18वीं शती में प्रचलित सामाजिक शिष्टाचार और वार्तालाप के 10 नियमों को लिख कर रखा और जिंदगी भर उनका पालन किया. वर्जीनिया विश्वविद्यालय में शुरू किये गये एक प्रोजेक्ट के तहत युवाओं से अपेक्षा की जा रही है कि वो जॉर्ज वॉशिंगटन के नियमों का फिर से अध्ययन करें और 21वीं सदी के अमेरिका के लिए सामाजिक शिष्टाचार के नियम तैयार करें. फ़ैज़ा अल्मसरी इस प्रोजेक्ट के बारे में और अधिक जानकारी लेकर आई हैं.
वर्जीनिया विश्वविद्यालय के पेपर्स ऑफ जॉर्ज वाशिंगटन के मुख्य-संपादक थियोडोर क्रैकल के अनुसार प्रथम राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन सामाजिक शिष्टाचार के नियमों के बारे में इतने सजग थे कि उन्होंने अपनी पूरी जिदंगी इन नियमों का अच्छी तरह से पालन किया.
क्रैकल कहते हैं " जॉर्ज वॉशिंगटन जब 16 वर्षीय किशोर थे उस समय उन्होंने एक अंग्रेज जनरल के बारे में एक पुस्तक में पढ़ा जो सामाजिक शिष्टाचार के नियमों के पालन में विश्वास करते थे. उन्होंने इन नियमों को एक जगह उतारा और फ़िर कुछ एक अपवादों को छोड़कर संपूर्ण जीवन उनका पालन किया. इससे उन्हें क्रोध को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिली और इन्हीं गुणों ने उन्हें एक महान व्यक्ति बनाया.
क्रैकल के अनुसार इन नियमों का मूल आधार 16वीं शती का फ्रांस का एक जेसुइट विद्यालय था. ये नियम जीवन के सभी पहलुओं पर लागू होते थे...कुछ सार्वभौमिक हैं...और आज भी प्रासंगिक हैं.
क्रैकल कहते हैं इनमें अहम हैं..."कोई बात कर रहा हो तो बीच में मत टोको, यदि आप अन्य लोगों के साथ घूम रहे हैं...तो उन्हें साथ लेकर चलो....उनके आगे-आगे मत चलो....यदि किसी से बात करनी हो तो उचित आवाज और सही लहज़े में बात करो."
क्रैकल के अनुसार सत्रहवीं शती में सांस्कृतिक वातावरण ऐसे नियम अपनाने को प्रोत्साहित करने वाला था जो कि अब बदल गया लगता है.
क्रैकल कहते हैं "ऐसा लगता है कि हम अत्यधिक व्यस्त हो गये हैं...लगातार भागते और काम करते रहते हैं...पहले जिंदगी की रफ़्तार कुछ सुस्त और आसान थी....लेकिन अब जिंदगी कहीं ज्यादा जटिल और तेज रफ़्तार है और इसका असर सामाजिक शिष्टाचार पर भी दिख रहा है."
क्रैकल कहते हैं कि अब आधुनिक अमरीकी भी सोचने लगे हैं कि समाज शिष्टता के नियमों का और पालन करे तो अच्छा रहेगा. जैसे "सभी लोग उन लोगों से त्रस्त हैं जो सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल फोन पर तेज आवाज में बात करते हैं...मैंने ऐसे लोगों को भी देखा है जो सड़क के किनारे चलते हुए अकेले ही सारे रास्ते को घेर कर रखते हैं...ऐसा ही वाहन चलाते समय भी देखने में आता है...कुछ लोगों को लगता है कि समूची सड़क उन्हीं की कार के लिये है."
आधुनिक जीवन में भी सामाजिक शिष्टता को महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए श्री क्रेकल ने वर्जीनिया विश्वविद्यालय में "21वीं सदी में जॉर्ज वॉशिंगटन" नामक प्रोजेक्ट शुरू किया है.
उनके अनुसार "हम चाहते हैं कि लोग जॉर्ज वॉशिंगटन के नियमों के बारे में सीखें...दूसरा आज के युवाओं को अहसास हो कि वो भी इन नियमों अपना सकते हैं...और ये बुजुर्गों के लिये भी प्रासंगिक हैं."
मिस मैनर्स नामक स्तंभ की लेखिका जूडिथ मॉर्टिन इस प्रोजेक्ट की सलाहकार हैं. मार्टिन ने पिछले महीने ही इस प्रोजेक्ट का उदघाटन किया. इतिहास की छात्र एरिका मिशेल प्रोजेक्ट की स्टूडेंट चेयर हैं. मिशेल बताती हैं कि अभी करीब 35 छात्र इस प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं.
मिशेल कहती हैं कि ये प्रोजेक्ट केवल छात्रों के लिये ही नहीं है लेकिन इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी को बढ़ाना है क्योंकि नियमों का चयन वही करेंगे और प्रोजेक्ट की सफलता इसी में होगी कि इसमें अलग-अलग नजरियों को जगह दी जा सके. छात्र गर्मियों तक प्रोजेक्ट में नये नियम भेज सकते हैं जिससे पतझड़ तक 110 नये नियम चुनने का काम पूरा हो सके. किसी को भी अभी पता नहीं है कि सामाजिक शिष्टाचार के नये 110 नियम कौन से होंगे...लेकिन शिष्टता को अमरीकी अन्तःकरण में पुनः स्थान मिल सकेगा.
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