|
|
|
श्री लंका के राष्ट्रपति ने 48 घंटों के युद्ध विराम का आदेश दिया
|
13/04/2009
|
|
 | | Government soldier stands guard at roadside check point in Colombo | श्री लंका की सेना ने दो दिनों के युद्ध विराम का पालन शुरू कर दिया है, और तमिल टायगर विद्रोहियों से आग्रह किया है कि नागरिकों को युद्ध ग्रस्त उत्तरी क्षेत्र से बाहर निकलने की अनुमति दे दें. नई दिल्ली से अंजना पसरीचा की रिपोर्ट है कि छापामारों को नष्ट करने के अभियान को रोकने के अंतर्राष्ट्रीय आह्वान के मद्दे नज़र सरकार ने युद्ध विराम की घोषणा की है.
एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि रविवार मध्य रात्रि से तमिल टायगर विद्रोहियों पर किए जा रहे हमले बंद कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सैनिकों से तभी गोली चलाने कहा गया है जब उन पर गोली चलाई गई हो.
सरकार द्वारा दो दिनों के संक्षिप्त युद्ध विराम की घोषणा सिंहली और तमिल नव वर्ष के अवसर पर की गई है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के समाचार माध्यम केन्द्र के निदेशक लक्ष्मण हुलूगाल्ले ने कहा कि सरकार को आशा है कि तमिल टायगर्स, नागरिकों को उस संकरे तटीय क्षेत्र से जाने देने की राह में बाधा नहीं बनेंगे जो विद्रोहियों का गढ़ है-
“हमें आशा है कि तमिल टायगर आतंकवादी बेकसूर नागरिकों को छोड़ देंगे. हम यही चाहते हैं जो सबसे महत्वपूर्ण है.”
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नागरिकों ने उस क्षेत्र से वास्तव में जाना शुरू किया है या नहीं. अतीत में तमिल टायगर्स उस क्षेत्र से जाते नागरिकों को रोकते रहे हैं और उनका इस्तेमाल मानवीय ढाल के रूप में करते रहे हैं.
राष्ट्रसंघ के अनुमान के अनुसार लगभग 100,000 नागरिक युद्ध क्षेत्र में फंसे पड़े हैं. इस विश्व संस्था ने एक लाभकारी क़दम कह कर युद्ध विराम का स्वागत किया है लेकिन कहा है कि मानवीय कारणों से उसने जितने समय के युद्ध विराम का आग्रह किया था, उससे यह कहीं कम है.
हाल के दिनों में कई देशों के तमिल समुदायों ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से यह आग्रह करने के लिए प्रदर्शन बढ़ा दिए हैं कि वह हमले बंद करने के लिए श्री लंका पर और दबाव डाले.
लेकिन श्री लंका सरकार ने सभी छपामारों का सफ़ाया किए बिना सैनिक अभियान समाप्त करने की संभावना से इन्कार किया है.
सरकारी प्रवक्ता हुलूगाल्ले ने कहा कि छापामारों के आत्म समर्पण के साथ ही लड़ाई समाप्त होगी- “समारोहों के दौरान अगर वह अपने अस्त्र त्याग दें तो लड़ाई समाप्त हो जाएगी. हम किसी को मारना नहीं चाहते, हम वह दिन देखना चाहते हैं जब तमिल छापामार अपने अस्त्र त्याग देंगे. जिस दिन वह अपने अस्त्र त्याग कर आत्म समर्पण कर देंगे, उस दिन लड़ाई समाप्त हो जाएगी.”
राष्ट्रसंघ ने चेतावनी दी है कि अगर बचे हुए लड़ाका विद्रोहियों का सफ़ाया करने के लिए थल सेना उस क्षेत्र में प्रवेश करती है तो और अधिक नागरिक मारे जाएंगे.
विद्रोहियों ने अपने अलग तमिल क्षेत्र की मांग में 25 वर्ष पहले अभियान शुरू किया था और उन्हें विश्व का सबसे घातक छापामार दल माना जाता है. लेकिन पिछले वर्ष से वह अपने नियंत्रण वाले लगभग सभी क्षेत्रों को खोते जा रहे हैं.
|
|
|