कलाकृतियों और दूसरी पुरानी वस्तुओं में अफ़ग़ानिस्तान की सांस्कृतिक विविधता की झांकी
होस्टन के कला संग्रहालय में एक चलती फिरती प्रदर्शनी के जरिये अफ़ग़ानिस्तान की अनमोल कलाकृतियों को दिखाया जा रहा है....ये प्रदर्शनी वहां 17 मई तक रहेगी..."अफ़ग़ानिस्तानः काबुल के राष्ट्रीय संग्रहालय का अनदेखा खज़ाना" शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी को नेशनल जियोग्रॉफिक सोसाइटी ने अफ़गा़न अधिकारियों के सहयोग से आयोजित किया है...इसमें कई ऐसी वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है...जो कि अफ़गानिस्तान में भी पूरी तौर पर उपलब्ध नहीं हैं...वॉइस ऑफ़ अमेरिका के ग्रेग फ्लॉकुस इसी बारे में बता रहे हैं....
संग्रहालय आने वालों को एक ऐसा अफ़गानिस्तान दिखाई पड़ रहा है जो युद्ध संबंधी खबरों से अलग है. इस प्रदर्शनी में उन्हें सिकंदर महान, ईरानी और चीनी लोगों का देश पर असर देखने को मिलता है.
एक दर्शक डेव कैम्प कहते हैं.."ये अदभुत है...मैंने भारतीय, ईरानी और ग्रीक संस्कृतियों का ऐसा संगम पहले नहीं देखा था."
स्वर्ण कलाकृतियां और बैक्ट्रीयन जनजाति का स्वर्ण मुकुट आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं...पुरातत्वशास्त्रियों ने एक मकबरे से ऐसी 20 हजार वस्तुओं को पाया था...लेकिन 1978 में देश में लड़ाई छिड़ने पर अधिकारियों ने इन्हें छुपा दिया था...जिन्हें 2003 में दोबारा खोजा गया. उरलीन डॉरलिक सोना देखने आये थे...लेकिन उन्हें यहां शीशे, ताम्र और हांथी दांत की कलाकृतियों ने हैरत में डाल दिया...
अफ़गानिस्तान में कलाकृतियों की देखभाल के आगाखान ट्रस्ट से जुड़े अहत म्यावनहदी कहते हैं..." अफ़गानिस्तान जैसे बहुसांस्कृतिक, बहुधर्मी देश में संस्कृति ही हमें बांधे रहती है." उन्होंने बाग-ए-बाबर जैसे स्थलों के पुनर्निमार्ण की जानकारी भी दी. उनके अनुसार पुनर्निर्माण के साथ आस-पास रहने वालों को इसके स्वामित्व का अहसास कराया जाना चाहिये...इससे न वो केवल इन धरोहरों का ख्याल रखेंगे...बल्कि उन्हें अपनी सभ्यता और साझा इतिहास की गहराई का अहसास भी होगा.
होस्टन के बाद ये प्रदर्शनी अब न्यूयॉर्क जायेगी...इसके आयोजक एक सुरक्षित अफ़गानिस्तान में इस प्रदर्शनी के आयोजन की आस लगाये हुये हैं.