समलैंगिकता पर न्यायालय के निर्णय पर बहस जरूरी: महिला आयोग
04/07/2009
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय
द्वारा समलैंगिकता को अपराध की परिभाषा से बाहर रखने के निर्णय पर राष्ट्रव्यापी बहस
की जरूरत है.
महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजी व्यास ने कहा, "आयोग
का मानना है कि इस मुद्दे पर राष्ट्र व्यापी चर्चा की आवश्यकता है क्योंकि इस निर्णय
से पूरे समाज पर असर पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार, नागरिकों और स्वयंसेवी संगठनों के बीच
सेक्स अपराध संबंधी विधेयक पर चर्चा के दौरान बातचीत हुई थी. उस समय अनुच्छेद 377,
376 और 375 सभी पर विचार हुआ था...जो कि सेक्स अपराधों से संबंधित है.
लेकिन इस चर्चा को और व्यापक बनाये जाने की जरूरत है.
गुरुवार को एक ऐतिहासिक निर्णय में दिल्ली उच्च न्यायालय
ने भारतीय दण्ड सहिंता की धारा अनुच्छेद 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी
में रखने से इंकार कर दिया था.
हालांकि इस मुद्दे पर देश में बहस जारी है नई सरकार
के गृह, कानून और स्वास्थ्य मंत्री इस
विषय पर कानूनी बदलाव के बारे में विचार कर चुके हैं...लेकिन इस विषय की संवेदनशीलता
को देखते हुये सरकार इस मामले में संभलकर कदम आगे बढ़ा रही है.