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बजट एक नज़र में
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By कृष्णानन्द त्रिपाठी
06/07/2009
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 | | Average Indian has not felt the benefits of India's economic boom | भारत के इतिहास में पहली बार बजट में सकल व्यय ने 10 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है. इस बार बजट खर्च 10 लाख 20 हजार 838 करोड़ रुपये का रहने का अनुमान है जो कि पिछले साल की तुलना में 36 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें 6.95 लाख करोड़ रुपये गैर योजना मद के तहत खर्च किये जायेंगे.
वित्तमंत्री ने लोकसभा में कहा कि वर्ष 2008-09 में आर्थिक विकास की दर घटकर 6.7 प्रतिशत पहुंच गई जबकि इसके पहले के तीन सालों में ये औसत 9 प्रतिशत थी. सरकार ने कहा कि 2008-09 में कृषि क्षेत्र में विकास की दर 4 प्रतिशत रही.
वित्तमंत्री ने कहा कि अगस्त में मुद्रास्फीति 13 प्रतिशत तक पहुंच गई थी जो कि घट कर शून्य प्रतिशत के पास पहुंच गई है.
सरकार ने पिछले साल की तुलना में रक्षा बजट में 34 प्रतिशत की वृद्धि करने की घोषणा की है. 2008-09 में रक्षा मद पर करीब 1 लाख 5 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है जबकि 2009-10 के लिये सरकार ने इस राशि को बढ़ाकर 1 लाख 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर दिया है.
भारत निर्माण परियोजना के तहत व्यय की जाने वाली धनराशि में 45% की वृद्धि का प्रस्ताव है. जबकि सिंचाई परियोजनाओं के लिये व्यय में इस वर्ष 75% की वृद्धि करने का प्रस्ताव है.
वैश्विक मंदी से निपटने के लिये सरकार के विशेष प्रोत्साहन पैकेज का सीधा असर सरकार की आमदनी पर पड़ा है. 2008-09 में राजस्व घाटा 6.2 प्रतिशत पहुंच गया जबकि 2007-08 में ये केवल 2.7 प्रतिशत था. वर्ष 2009-10 में राजस्व घाटे के 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
वित्तमंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी है कि 2008-09 में सरकार को करों से 6,87,715 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है. जबकि 2009-10 में इसके घटकर 6,41,00 करोड़ रह जाने का अनुमान है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2008-09 में प्रत्यक्ष करों का राजस्व में योगदान 2007-08 के 41 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया.
कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ते हुये नये प्रत्यक्ष कर संहिता को 45 दिनों के अंदर जारी करने की घोषणा की गई है. वित्तमंत्री ने कहा कि एक समान उत्पाद और सेवा (GST) कर को अप्रैल 2010 से लागू कर दिया जायेगा.
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