मध्य प्रदेश सरकार ने आज राज्य विधानसभा में स्वीकार कर लिया है कि राज्य के पन्ना अभ्यारण्य में कोई बाघ नहीं बचा है. पन्ना में इस समय अभी केवल वही दो बाघ है जिन्हें दूसरे अभ्यारण्यों से वहां लाया गया है और कोशिश की जा रही है कि यह दोनों पन्ना को अपना नया घर स्वीकार कर लें.
वन राज्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने विधानसभा को बताया कि वन विभाग द्वारा की गई गणना के दौरान पन्ना में कोई बाघ नहीं मिला है.
कॉंग्रेस के महेंद्र सिंह द्वारा उठाये एक प्रश्न का उत्तर देते हुये मंत्री ने कहा कि सन 2006 में पन्ना में 24 बाघ थे. ये अभ्यारण्य पूर्वी मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है और 543 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है.
इससे पहले नेशनल टॉइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पन्ना से सभी बाघ लुप्त हो गये हैं. रिपोर्ट में कहा गया था कि ज्यादातर बाघों की स्वाभाविक मौत नहीं हुई है...इन्हें शिकारियों ने खाल के लालच में मार डाला है.