|
|
|
नई दिल्ली में अमरीकी विदेश मंत्री क्लिंटन की भारतीय नेताओं से मुलाक़ात
|
20/07/2009
|
|
 | | Secretary Clinton signs the 26/11 memorial book at the Taj Mahal Palace Hotel in Mumbai, 18 Jul 2009 | श्रीमती क्लिंटन ने कहा कि उनके विचार में पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी धरती पर आतंकवादी तत्वों से लड़ने के प्रयास जारी रखे है. इस बारे में नई दिल्ली से हमारे संवाददाता डेविड गोलस्ट बताते हैं –
शुक्रवार को मुंबई से आरंभ हुई विदेश मंत्री क्लिंटन की भारत यात्रा, उस शहर में पिछले वर्ष नवंबर में हुए पाकिस्तानी आतंकवादी हमलों की बार बार याद दिला रही है जिनमें 166 लोग मारे गए थे और जिसके कारण दक्षिण एशिया की दोनों शक्तियों के बीच तनाव पैदा हो गया है.
विदेश मंत्री उन दो होटलों में से एक में ठहरीं थीं , जिन पर आतंकवादियों ने हमला किया था और उन्होंने वहां उन हमलों में मारे गए लोगों की याद में आयोजित स्मृति सभा में भाग लिया.
नई दिल्ली में औपचारिक वार्ताएं शुरू होने की पूर्व संध्या पर श्रीमती क्लिंटन ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हाल के महीनों में पाकिस्तान ने अपनी धरती पर सक्रिय अतिवादियों को रोकने के भरसक प्रयास किए हैं.
“पिछले छह महीनों से पाकिस्तान सरकार के साथ काम करने के दौरान हमने देखा कि पूरी सरकार आतंकवाद से लड़ने के प्रति वचनबद्ध है. और यही हमारी प्रत्याशा भी है. हम चाहते भी यही हैं. हम अपनी सरकार के सभी स्तरों, सेना, नागरिक और ख़ुफ़िया स्तरों से इसके बारे में बात करते हैं. और मैंने सीधे पाकिस्तानी जनता को संदेश भेजे हैं कि इसी में पाकिस्तान की भलाई है.”
श्रीमती क्लिंटन ने यह विश्वास कि इस्लामाबाद में आतंकवाद को समाप्त किए जाने की वचनबद्धता सरकार के हर स्तर में है, पाकिस्तान की ख़ुफ़िया सेवा के बारे में व्यक्त किए गए संदेह के उत्तर में दिलाया, जिस पर एक लंबे समय से इस्लामी अतिवाद से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं.
उन्होंने भारत में उनसे इंटर्व्यू लेने वालों से कहा कि उन्हें आशा है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तानी अधिकारी, मुंबई हमलों से संबंधित लोगों को क़ानून के हवाले करने के लिए उचित कार्यवाही करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्हें चिंता होगी.
आज सोमवार को पूरे दिन वह भारतीय अधिकारियों से भेंट करेंगी, साथ ही वह सत्तारूढ़ कौंग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रतिपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण अडवाणी से भी भेंट करेंगी.
प्रत्याशा है कि दोनों पक्ष अमरीकी विदेश मंत्री क्लिंटन और भारतीय विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के नेतृत्व में औपचारिक सामरिक वार्ताओं की स्थापना करेंगे और सन् 2005 में संपन्न भारत-अमरीकी परमाणु सहयोग संधि से संबंधित कम से कम दो समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे.
एक समझौते में अमरीकी कंपनियों के लिए भारत में दो परमाणु विद्युत कारख़ाने बनाने के स्थल निर्धारित किए जाएंगे और दूसरे समझौते में यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि भारत को बेची गई अमरीकी शस्त्र टैक्नोलोजी का किसी अन्य देश को हस्तांतरण नहीं किया जाएगा. इस समझौते से अमरीका के कई तरह से इस्तेमाल किए जाने वाले लड़ाका विमानों की भारत को बिक्री का रास्ता खुल जाएगा.
|
|
|