मुंबई आतंकी हमला मामले में बचाव पक्ष के वकील अब्बास काज़मी ने बृहस्पतिवार को मुकदमे से अलग होने की इच्छा जाहिर करके मुकदमे को नया मोड़ दे दिया हालांकि बाद में न्यायाधीश एम एल ताहिलियानी ने उनसे कसाब से बात करके गलतफहमी दूर करने का अनुरोध किया.
वाइस ऑफ अमेरिका के नई दिल्ली स्थित संवाददाता कृष्णानन्द त्रिपाठी से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये बात सही है कि कसाब ने अदालत में गुनाह कबूलने जैसा बड़ा फैसला बगैर उनसे कानूनी सलाह लिये हुये उठाया...जिसकी वजह से उन्हें लगा कि उनके मुवक्किल का भरोसा उनके ऊपर से उठ गया है...और कसाब को उनकी जरूरत नहीं है जिसकी वजह से उन्होंने अदालत से आज कहा कि वो इस मुकदमे से अलग होना चाहते हैं.
श्री काज़मी ने कहा कि न्यायाधीश ने उनसे कहा कि दोपहर के खाने के दौरान वो कसाब से बात करके आपसी गलतफहमी दूर कर सकते हैं. और जब कसाब ने अदालत में कहा कि उसका भरोसा उनके ऊपर बना हुआ है तो उन्होंने इस मुकदमें से अलग होने का अपना फैसला वापस ले लिया.
वीओए न्यूज़ से बातचीत में श्री अब्बास काज़मी ने माना कि इस तरह के मुकदमें केवल दो तरह की सजा का ही प्रावधान है....मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास...उन्होंने ये भी माना कि कसाब के अचानक गुनाह कबूल कर लेने से उनका काम काफी मुश्किल हो गया है.
कसाब के वकील श्री अब्बास काज़मी से इंटरव्यू आप साथ में दिये हुये लिंक पर क्लिक करके सुन सकते हैं.