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भारत द्वारा सरकारी कर्मचारियों के बीच समय की पाबन्दी को बढ़ावा
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01/09/2009
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 | Indian Home Minister P.Chidambaram in New Delhi
| भारत के सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से कहा जाता रहा है कि वह समय के पाबन्द नहीं हैं. लेकिन अब उन्हें यह पुरानी आदत बदलनी पड़ सकती है. नई दिल्ली से अंजना पसरीचा बताती हैं कि गृह मंत्रालय के कार्यालय में समय की पाबन्दी को बढ़ावा देने के लिए बायोमीट्रिक स्कैनर्स लगाये गए हैं,
सरकारी कर्मचारियों के लिए काम पर समय से आने का संदेश किसी और ने नहीं, बल्कि सरकार के वरिष्ट मंत्रियों में से एक ने दिया.
गृह मंत्री पी चिंदबरम नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में सुबह नौ बजे पहुंचे और एक बायोमीट्रिक स्कैनर पर अपनी बीच की उंगली रख कर अपने आने का समय दर्ज किया.
गृह मंत्री की तरह गृह मंत्रालय के हजारों कर्मचारी अपने आने जाने का समय दर्ज करने के लिए यही करेंगे. एक महीने दस मिनट देर से आने पर एक दिन की छुट्टी कटेगी.
यह सरकारी कर्मचारियों की देर से आने और जल्दी चले जाने की परम्परा समाप्त करने की शुरुआत है.
गृह मंत्री पी चिंदबरम को आशा है की यह संदेश न केवल सरकारी कर्मचारी, बल्कि अन्य कर्मचारी भी सुनेंगे.
"मुझे आशा है कि लोग इस प्रणाली के महत्व और इसे लागू करने की वजह को समझेंगे. लेकिन यह संपूर्ण देश के लिए संदेश है कि हर व्यक्ति को अपना काम निर्धारित समय पर करना चाहिए. मैं आवश्यकता के अनुसार समय में फेर बदल करने के विचार को भी समझता हूँ, और हम जल्दी ही उसे भी लागू करेंगे, लेकिन समय में फेर बदल का मतलब होगा कि अगर आप दस या पन्द्रह मिनट देर से आते हैं तो आपको निर्धारित समय से दस या पन्द्रह मिनट देर तक काम करना होगा."
गृह मंत्रालय का यह पाबन्दी अभियान हजारों लोगों के लिए वरदान है जो सरकारी कर्मचारियों के काम पर आने की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करते हैं और जिन्हें पासपोर्ट जैसे सार्वजनिक दस्तावेजों की प्रक्रिया में विलंब का सामना करना पड़ता है. उन्हें आशा है कि केन्द्र सरकार के लगभग तीस लाख से अधिक अन्य कर्मचारी भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे.
लेकिन समाजवादी ध्यान दिलाते हैं कि समय की गडबडी के लिए केवल सरकारी कर्मचारियों को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. समय की पाबन्दी भारतीयों के वश में नहीं है, चाहे वह अधिकारी वर्ग के स्तर पर हो या सामाजिक स्तर पर. रेल गाड़ियों का लेट होना या दफ्तर की किसी मीटिंग में देर से पहुंचना आम बात है. दोपहर या रात के खाने पर समय से पहुँचने की किसी को फ़िक्र नहीं होती, और शादी ब्याह में तो कोई काम समय पर होता ही नहीं.
भारत आने वाले विदेशी व्यवसायियों को अक्सर सलाह दी जाती है कि वह एक दिन में कई लोगों से भेट की योजना न बनायें क्योंकि बहुत से लोग समय के पाबन्द नहीं होते.
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