अन्तराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ और जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक इंदर सूद
का कहना है की आश्चर्य ज़रूर हुआ है नोबेल समिति के इस निर्णय से. लेकिन राष्ट्रपति ओबामा
के चुने जाने की वजह समिति के मुताबिक है की बराक ओबामा ने कूटनीति के माहौल को
दुनियाभर में बदला है.
प्रोफ. सूद का मानना है यह फैसला सही था और हालाँकि श्री ओबामा
विश्व में किसी शान्ति समझौते के लिए अभी तक जिम्मेदार नहीं हैं लेकिन वे कूटनीति के माहौल
में बदलाव लाने में कामयाब ज़रूर रहे हैं.
लेकिन प्रोफ. सूद का कहना है की अफगानिस्तान की चुनौती राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल
में छाई रहेगी. अफगानिस्तान में अतिरिक्त सैनिक भेजने या न भेजने का फैसला इस पुरस्कार से
किसी तरह प्रभावित नहीं होगा.
उनके सामने नयी नीति को तय करना किसी हाल में आसान
नहीं होगा. प्रोफ. सूद का यह भी मानना है की अर्थव्यवस्था, बेरोज़गारी, स्वस्थ्य सुधार
जैसे विवादास्पद घरेलु मुद्दों पर भी नोबेल शान्ति पुरस्कार का असर नहीं होगा.
अन्तराष्ट्रीय स्तर पर ज़रूर राष्ट्रपति ओबामा का कद और ऊंचा हुआ है लेकिन श्री ओबामा के
सामने चुनातियों की कमी नहीं है और उन्हें बहुत मेहनत करनी होगी. अन्तराष्ट्रीय स्तर पर
अफगानिस्तान और इरान राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में हावी रहेंगे. प्रोफ. सूद ने यह भी
कहा की नोबेल शान्ति पुरस्कार के साथ हमेशा से ही विवाद जुड़े रहे हैं.